चुनाव में बहुमत नहीं मिला तो भी PM बने रहेंगे नेतन्याहू? जानें इजरायल में कैसे बनती है सरकार

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नई दिल्ली: इजरायल में चुनाव के नतीजों के बाद भी सत्ता की तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन सबसे बड़े गुट के रूप में जरूर सामने आया है, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़े से दूर है। दूसरी ओर विपक्षी नेता गादी आइजनकोट का गठबंधन भी बहुमत हासिल करने में पीछे रह गया है। ऐसे में इजरायल की सत्ता किसके हाथ में जाएगी, यह अब दूसरी पार्टियों के समर्थन पर निर्भर करेगा। इस बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि बहुमत नहीं मिलने के बावजूद क्या नेतन्याहू अगले साल तक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं?

चुनाव के शुरुआती रुझानों के अनुसार, 120 सदस्यों वाली इजरायली संसद में नेतन्याहू के गठबंधन को करीब 53 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को लगभग 48 सीटें मिल सकती हैं। इसके अलावा अरब पार्टियों के खाते में 19 सीटें जाने की संभावना जताई गई है। इजरायल में सरकार बनाने के लिए संसद के कम से कम 61 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। फिलहाल कोई भी गठबंधन इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया है। ऐसे में सरकार बनाने के लिए दलों को आपस में बातचीत करनी होगी और दूसरे सांसदों का समर्थन जुटाना पड़ेगा।

सरकार नहीं बनी तो भी पद पर रहेंगे नेतन्याहू?

इजरायल की राजनीतिक व्यवस्था में चुनाव खत्म होते ही प्रधानमंत्री का पद खाली नहीं होता। जब तक नई सरकार का गठन नहीं हो जाता और वह शपथ नहीं ले लेती, तब तक मौजूदा प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट देश का कामकाज संभालते रहते हैं। इस व्यवस्था को कार्यवाहक सरकार कहा जाता है।

इसका मतलब है कि चुनाव में बहुमत नहीं मिलने के बाद भी नेतन्याहू प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं। हालांकि, उनका आगे तक पद पर बने रहना इस बात पर निर्भर करेगा कि नई सरकार बनाने की प्रक्रिया कितनी लंबी चलती है।

राष्ट्रपति तय करते हैं किसे मिलेगा सरकार बनाने का मौका

चुनाव के बाद इजरायल के राष्ट्रपति अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं से बातचीत करते हैं। इसके बाद वह उस सांसद को सरकार बनाने का मौका देते हैं, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे अच्छी संभावना होती है। इसके लिए उम्मीदवार को शुरुआत में 28 दिन का समय मिलता है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति 14 दिन की अतिरिक्त मोहलत भी दे सकते हैं। अगर पहला उम्मीदवार बहुमत जुटाने में नाकाम रहता है, तो किसी दूसरे नेता को मौका दिया जा सकता है। इसके बाद भी सरकार नहीं बनती है, तो संसद के सदस्य किसी अन्य उम्मीदवार का नाम आगे रख सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कई सप्ताह लग सकते हैं।

सरकार गठन में नाकामी पर फिर हो सकते हैं चुनाव

अगर तमाम कोशिशों के बाद भी कोई नेता बहुमत हासिल नहीं कर पाता, तो संसद भंग होने और नए चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। तब तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। हालांकि, कार्यवाहक सरकार से बड़े नीतिगत फैसले लेने में सावधानी बरतने की उम्मीद की जाती है। इसका उद्देश्य नई सरकार बनने तक देश का प्रशासन और जरूरी कामकाज जारी रखना है।

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