पाकिस्तान सरकार और इमरान खान की पार्टी में नहीं बनी बात, आज 4 अक्टूबर को सड़कों पर उतरेंगे हजारों समर्थक

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नई दिल्ली: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई और उनसे जुड़ी मांगों को लेकर सरकार और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के बीच बातचीत बेनतीजा रही। दो दौर की बातचीत के बाद भी दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। इसके बाद PTI ने अपना लॉन्ग मार्च निकालने का फैसला किया है। पार्टी के समर्थक अब इस मार्च के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में हैं। PTI की प्रमुख मांगों में जेल में बंद इमरान खान से पार्टी नेताओं और परिवार की मुलाकात शामिल है। पार्टी चाहती है कि इमरान खान को उनकी पसंद के निजी डॉक्टरों से इलाज कराने की सुविधा मिले और जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाए।

PTI की ओर से इमरान खान की बहनों और पार्टी से जुड़े कुछ समर्थकों की रिहाई की मांग भी उठाई गई है। इसके अलावा उनकी पत्नी बुशरा बीबी की मेडिकल जांच को लेकर भी पार्टी ने सवाल उठाए हैं। सरकार की ओर से PTI के सामने सबसे बड़ी शर्त यह थी कि पार्टी अपना प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च रद्द करे। हालांकि, PTI इन मांगों से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हुई।

दो दौर की बातचीत के बाद भी नहीं निकला रास्ता

सरकार और PTI के बीच बातचीत का पहला दौर शुक्रवार को हुआ था, जबकि दूसरे दौर की बैठक शनिवार को हुई। दोनों बैठकों में कई मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन इमरान खान से मुलाकात और उनके इलाज को लेकर गतिरोध बना रहा।

PTI ने पहले 27 सितंबर को मार्च निकालने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में इसे टालकर 4 अक्टूबर कर दिया गया। अब बातचीत विफल होने के बाद पार्टी ने अपने समर्थकों को मार्च के लिए तैयार रहने को कहा है।

इस्लामाबाद की ओर बढ़ेंगे समर्थक

PTI समर्थकों का मार्च खैबर पख्तूनख्वा से शुरू होकर इस्लामाबाद की ओर बढ़ने वाला है। पार्टी का कहना है कि यह प्रदर्शन इमरान खान की रिहाई और उनकी स्वास्थ्य संबंधी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। वहीं, सरकार ने भी संभावित प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। इस्लामाबाद और आसपास के इलाकों में कंटेनर लगाए जाने तथा रास्तों पर सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी की गई है।

इमरान खान लंबे समय से जेल में हैं और उनकी पार्टी लगातार उनकी रिहाई की मांग कर रही है। ऐसे में सरकार और PTI के बीच बातचीत का विफल होना पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ने का संकेत माना जा रहा है। अब सबकी नजर 4 अक्टूबर के लॉन्ग मार्च और सरकार की प्रतिक्रिया पर है।

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