नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने से काफी नाराज हैं। शुक्रवार को उन्होंने इस फैसले पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे शर्मनाक और अपमानजनक बताया। ट्रंप ने कहा कि इस फैसले से नॉर्वे की छवि को ऐसा नुकसान पहुंचा है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा। उन्होंने साफ कहा कि वह इस फैसले को भूलने वाले नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने पुरस्कार के लिए चुनी गईं नवानेथेम नवी पिल्लै के चयन पर भी सवाल उठाए।
ट्रंप ने कहा कि इस बार शांति पुरस्कार ऐसे व्यक्ति को दिया गया है, जिनके बारे में उन्होंने पहले कभी नहीं सुना। हालांकि, नवी पिल्लै अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की पूर्व जज रह चुकी हैं। ट्रंप का मानना है कि दुनिया में शांति स्थापित करने के उनके प्रयासों को नजरअंदाज किया गया है।
‘8 युद्ध खत्म कराए, मुझे मिलने चाहिए थे 8 नोबेल’
ट्रंप लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि उन्होंने कई देशों के बीच संघर्ष खत्म कराने में अहम भूमिका निभाई है। इस बार भी उन्होंने कहा कि उन्होंने आठ युद्ध सुलझाने में मदद की और इसके लिए उन्हें एक नहीं, बल्कि आठ नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे। उन्होंने गाजा और ईरान से जुड़े संघर्षों का भी जिक्र किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि उन्होंने ईरान को मध्य पूर्व, यूरोप और अमेरिका के कुछ हिस्सों में तबाही मचाने से रोका। हालांकि, ईरान के साथ तनाव और संघर्षविराम को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने के कारण उनके दावों पर सवाल उठ रहे हैं।
ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने का श्रेय भी खुद को दिया। इसके अलावा उन्होंने रवांडा-कांगो, थाईलैंड-कंबोडिया, आर्मेनिया-अजरबैजान, मिस्र-इथियोपिया और सर्बिया-कोसोवो के बीच विवादों का जिक्र किया। हालांकि, इन सभी मामलों में विवादों का पूरी तरह समाधान होने की बात स्पष्ट नहीं है।
पहले भी जता चुके हैं पुरस्कार पाने की इच्छा
नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रंप की दावेदारी नई नहीं है। वह पहले भी कई बार कह चुके हैं कि अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में उनकी भूमिका को देखते हुए वह इस सम्मान के हकदार हैं। दो दिन पहले भी उन्होंने दावा किया था कि किसी दूसरे अमेरिकी राष्ट्रपति ने उनकी तरह इतने संघर्ष खत्म कराने में भूमिका नहीं निभाई।
ट्रंप के शांति प्रयासों को लेकर उनके समर्थक और आलोचक अलग-अलग राय रखते हैं। उनके बताए कई विवादों में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि किन मामलों में उनके प्रयासों से स्थायी शांति स्थापित हुई। पुरस्कार नहीं मिलने के बाद ट्रंप ने नॉर्वे और नोबेल चयन प्रक्रिया पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि इस फैसले से पुरस्कार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।











