नई दिल्ली: तिब्बत और नेपाल में आई भीषण आपदा ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है. दोनों देशों में राहत और बचाव कार्य लगातार चल रहे हैं, लेकिन तिब्बत में इस आपदा की असली तस्वीर सामने लाना आसान नहीं है. चीन ने यहां आपदा से जुड़ी सूचनाओं पर कड़ा नियंत्रण कर दिया है. इंटरनेट पर सामने आ रही तस्वीरों और वीडियो को हटाया जा रहा है, जबकि मृतकों और लापता लोगों की संख्या बताने पर भी रोक लगाई गई है.
चीनी सेंसर सोशल मीडिया और अन्य इंटरनेट प्लेटफॉर्म से आपदा से जुड़े पोस्ट हटाने में जुटे हैं. सरकारी मीडिया के पत्रकारों और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसरों को भी निर्देश दिया गया है कि आधिकारिक घोषणा होने तक मृतकों और लापता लोगों की संख्या सार्वजनिक न करें.
सोशल मीडिया पोस्ट करने वालों पर कार्रवाई
आपदा के बाद कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर मृतकों और लापता लोगों से जुड़ी जानकारी साझा की. रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे लोगों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की है. इसमें जुर्माना लगाने से लेकर हिरासत में लेने तक के कदम शामिल हैं. कुछ मामलों में करीब 150 डॉलर तक का जुर्माना या 10 दिन तक हिरासत का प्रावधान बताया गया है.
तिब्बत और नेपाल में आपदा की रिपोर्टिंग को लेकर भी बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है. नेपाल में विदेशी पत्रकार प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचकर स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवारों से बात कर रहे हैं. वहीं, तिब्बत में विदेशी पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने की अनुमति नहीं है. चीन ने सूचना पर रोक लगाए जाने के आरोपों को दुर्भावनापूर्ण अटकलें बताते हुए खारिज किया है.
सरकारी मीडिया में राहत अभियान पर जोर
मंगलवार को तिब्बत के गिरोंग काउंटी में आधिकारिक शोक सभाएं आयोजित की गईं. चीनी सरकारी मीडिया ने राहत और बचाव अभियान से जुड़ी तस्वीरें दिखाईं. इनमें सड़कों से मलबा हटाते कर्मचारी, पुलिसकर्मी, डॉक्टर और आपातकालीन दल के सदस्य नजर आए.
सरकारी अखबार पीपल्स डेली ने भी अपनी रिपोर्ट में कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं और सदस्यों की भूमिका को प्रमुखता दी. हालांकि, सरकारी कवरेज में घायलों, मृतकों और उनके परिवारों की तस्वीरें बहुत कम दिखाई गईं. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र में खोज, बचाव और आपात राहत का काम तेजी से और व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है. उनका दावा है कि चीन की ओर से जारी की जा रही जानकारी पारदर्शी और समय पर है.
वास्तविक नुकसान पर उठ रहे सवाल
मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वाच की एशिया मामलों की डिप्टी डायरेक्टर माया वांग ने दावा किया कि चीनी सरकारी मीडिया से जुड़े मान्यता प्राप्त पत्रकारों को भी बचे लोगों और उनके परिवारों से बातचीत करने से रोका गया. उनके अनुसार, सत्तावादी सरकारें अक्सर सवालों और जवाबदेही से बचने के लिए सूचनाओं पर नियंत्रण रखती हैं. इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत ने भी दावा किया है कि बाढ़ से तिब्बत में हुई तबाही सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकती है.
संगठन का कहना है कि चीन ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि तिब्बत के कौन-कौन से गांव प्रभावित हुए हैं. जमीनी सूत्रों के हवाले से संगठन ने बताया कि साले, सेरचुंग, लाबी और रिजी सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं. यहां करीब 300 घर तबाह होने और कई लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी सामने आई है. संगठन के कार्यकारी निदेशक रयान फियोरेसी ने दावा किया कि कुछ बचे लोगों को गिरोंग शहर ले जाया गया है, जहां उनकी कड़ी निगरानी की जा रही है. उनका कहना है कि तिब्बत से स्वतंत्र रूप से सामने आने वाली सूचनाएं चीन के लिए संवेदनशील हो सकती हैं, क्योंकि इससे वहां की स्थिति और सरकार के सूचना नियंत्रण पर सवाल उठ सकते हैं.












