कार्तिक में विदेशी भक्तों से गुलजार हुए वृंदावन के बाजार, सात समंदर पार से आए कृष्ण भक्तों ने बढ़ाई रौनक

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वृंदावन: ठाकुर बांकेबिहारी की नगरी वृंदावन में कार्तिक मास की शुरुआत के साथ ही देशी-विदेशी श्रद्धालुओं की आमद बढ़ने लगी है। कान्हा की भक्ति में रमने के लिए सात समंदर पार से विदेशी कृष्ण भक्त ब्रजभूमि पहुंच रहे हैं। कोई तुलसी की सेवा में जुटा है तो कोई मंदिरों में दर्शन-पूजन और संकीर्तन के माध्यम से आध्यात्मिक आनंद ले रहा है। विदेशी श्रद्धालुओं के लिए कार्तिक मास केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, साधना और भगवान श्रीकृष्ण के करीब आने का विशेष अवसर है। यही वजह है कि रूस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, यूक्रेन, तुर्किए, जर्मनी और स्पेन समेत यूरोप के कई देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु वृंदावन पहुंच रहे हैं। एक माह तक चलने वाले कार्तिक नियम सेवा के दौरान ये भक्त ब्रज की गलियों में रहकर यहां की धार्मिक परंपराओं को आत्मसात कर रहे हैं।

कार्तिक में कृष्ण भक्ति, दीपदान और संकीर्तन में रमते विदेशी भक्त

विदेशी कृष्ण भक्तों के लिए कार्तिक मास का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण की आराधना, दीपदान, तुलसी सेवा, संकीर्तन और दामोदराष्टक के पाठ से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते विदेशी श्रद्धालु अपनी व्यस्त दिनचर्या और हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर वृंदावन आते हैं। सुबह की शुरुआत मंदिरों में दर्शन और हरिनाम संकीर्तन से होती है। इसके बाद परिक्रमा मार्ग, यमुना किनारे और विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना का क्रम चलता है। कई श्रद्धालु पूरे महीने सात्विक भोजन ग्रहण करते हुए नियम और संयम के साथ जीवन व्यतीत करते हैं। उनके लिए वृंदावन की धूल, मंदिरों की घंटियां, गलियों में गूंजता राधे-राधे और यमुना का तट किसी आध्यात्मिक दुनिया से कम नहीं है।

विदेशी श्रद्धालुओं की आमद से वृंदावन के बाजारों में बढ़ी रौनक

कार्तिक मास में विदेशी श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का असर वृंदावन के बाजारों में भी साफ दिखाई दे रहा है। मंदिरों के आसपास और प्रमुख बाजारों में सुबह से देर शाम तक चहल-पहल बनी हुई है। विदेशी भक्त पूजा सामग्री, तुलसी की मालाएं, जप की माला, धार्मिक पुस्तकें, भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के चित्र, पारंपरिक वस्त्र, पीतल की मूर्तियां और ब्रज की यादों से जुड़ी अन्य वस्तुओं की खरीदारी कर रहे हैं। इसके साथ ही स्थानीय होटल, धर्मशालाओं, आश्रमों, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट और ई-रिक्शा संचालकों को भी इन श्रद्धालुओं के आगमन से कारोबार मिलने लगा है। स्थानीय दुकानदारों के लिए कार्तिक मास का यह समय कारोबार के लिहाज से खास बन गया है। विदेशी भक्तों की पसंद को देखते हुए कई दुकानदार धार्मिक वस्तुओं और स्मृति चिह्नों की विशेष व्यवस्था भी कर रहे हैं।

ब्रज की संस्कृति और परंपराओं से जुड़ रहे विदेशी कृष्ण भक्त

वृंदावन की खासियत यह है कि यहां आने वाले विदेशी श्रद्धालु केवल मंदिरों के दर्शन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि ब्रज की संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़ते हैं। कई भक्त हिंदी के साथ ब्रज भाषा के शब्द भी सीखते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों से राधे-राधे कहकर अभिवादन करना, परिक्रमा करना, मंदिरों में होने वाले उत्सवों में शामिल होना और ब्रज के सात्विक खानपान का आनंद लेना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है। कुछ श्रद्धालु पहली बार वृंदावन पहुंचते हैं तो कई ऐसे भी हैं जो हर साल कार्तिक मास में यहां आकर पूरा महीना बिताते हैं। उनके लिए यह यात्रा किसी पर्यटन स्थल पर घूमने का अनुभव नहीं, बल्कि श्रीराधा-कृष्ण की भक्ति में स्वयं को समर्पित करने का अवसर है। विदेशी भक्तों की यह मौजूदगी वृंदावन की अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक पहचान को भी मजबूती दे रही है।

 

Reported By: Prem Kaushik

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