PM Modi Speech: पीएम मोदी ने दुनिया को दिया नया मंत्र, 'पावर टू कंट्रोल' नहीं अब 'पावर टू एनेबल' पर देना होगा जोर

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार की भूमिका पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज के दौर में ये सभी चीजें ताकत का बड़ा स्रोत बन चुकी हैं। हालांकि, असली सवाल यह नहीं है कि ताकत किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि तकनीक का लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इससे समाज के करोड़ों लोगों के लिए नए अवसर पैदा होने चाहिए।

‘पावर टू कंट्रोल’ नहीं, ‘पावर टू एनेबल’ पर जोर

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने विकास और तकनीक को लेकर एक नई सोच अपनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि दुनिया को अब ताकत के इस्तेमाल का नजरिया बदलना होगा। केवल दूसरों पर नियंत्रण रखने या प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिसमें लोग एक-दूसरे की मदद कर सकें और आगे बढ़ने के अवसर पा सकें।

प्रधानमंत्री के मुताबिक, तकनीक और ज्ञान का मकसद सिर्फ कुछ लोगों की क्षमता बढ़ाना नहीं होना चाहिए। इनका उपयोग दूसरों को सशक्त बनाने और उनकी तरक्की का रास्ता खोलने के लिए भी किया जाना चाहिए। उन्होंने सहयोग को प्रतिस्पर्धा से अधिक महत्व देने की बात कही। उनका संदेश था कि सफलता का अर्थ केवल खुद आगे बढ़ना नहीं, बल्कि दूसरों को भी सफल होने में मदद करना है।

भारत को बताया लोकतंत्र की जननी

पीएम मोदी ने भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और विविधता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग भाषाएं, विचार और दृष्टिकोण होने के बावजूद लोगों को अपनी बात रखने और बहस करने के अवसर मिलते हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि देश में 100 से अधिक भाषाएं, लगभग 80 हजार पंजीकृत समाचार पत्र और प्रकाशन तथा एक हजार से ज्यादा सैटेलाइट टीवी चैनल हैं। उनके मुताबिक, यह विविधता भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की खासियत को दर्शाती है।

डिजिटल माध्यमों की बढ़ती भूमिका

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में यूट्यूब और इंस्टाग्राम के 50 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं। डिजिटल माध्यमों ने लोगों को अपनी राय रखने, अलग-अलग विचारों को समझने और सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा करने का बड़ा मंच दिया है। उन्होंने डिजिटल ताकत को भी इस बदलाव का अहम हिस्सा बताया। पीएम मोदी का संदेश स्पष्ट था कि तकनीक, ज्ञान और नवाचार का सही इस्तेमाल तभी सार्थक होगा, जब इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को फायदा पहुंचे और समाज में सहयोग की भावना मजबूत हो।

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