नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस में सियासी ऐलान के बाद हलचल तेज हो गई है। एक तरफ सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने की घोषणा और दूसरी तरफ समर्थन में कार्यकर्ताओं को जुटने की अपील ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। इस घटनाक्रम का केंद्र बने पालिका बाजार के आसपास दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा का मजबूत घेरा तैयार कर दिया है। सैकड़ों पुलिसकर्मियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई बल की तैनाती ने पूरे इलाके में सुरक्षा की गंभीरता को साफ कर दिया है। हालांकि इस सख्त पहरे के बीच सबसे बड़ा सवाल बाजार के कारोबार को लेकर खड़ा हो गया है। व्यापारियों को आशंका है कि राजनीतिक गतिविधियों और सुरक्षा इंतजामों के कारण ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई तो इसका सीधा असर उनकी रोजी-रोटी पर पड़ेगा।
प्रेस वार्ता में ऐलान, फिर समर्थन की अपील से बढ़ी हलचल
दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपिका ने पालिका बाजार के सेंट्रल पार्क में झंडा फहराने का ऐलान किया। इसके कुछ ही समय बाद आम आदमी पार्टी की ओर से भी कार्यक्रम के समर्थन में कार्यकर्ताओं और आम लोगों से मौके पर पहुंचने की अपील की गई। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने संभावित भीड़ और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को देखते हुए व्यवस्था कड़ी कर दी। पालिका बाजार के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। सुरक्षा व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई बल की मौजूदगी के बीच आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है लेकिन इस व्यवस्था के बीच बाजार में खरीदारी करने आने वाले ग्राहकों और दुकानदारों की चिंता भी बढ़ गई है।
तीन एकड़ में फैला बाजार, 400 दुकानों की रोजी-रोटी दांव पर!
पालिका बाजार कोई सामान्य बाजार नहीं बल्कि दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में से एक है। वर्ष 1978 में स्थापित यह भूमिगत वातानुकूलित बाजार करीब तीन एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां लगभग 400 दुकानें हैं जिनके कारोबार का बड़ा हिस्सा ग्राहकों की नियमित आवाजाही पर निर्भर करता है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से लोग यहां खरीदारी करने पहुंचते हैं। ऐसे में बाजार के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था और संभावित प्रदर्शन की स्थिति छोटे व्यापारियों के लिए चिंता का विषय बन गई है। व्यापारियों का कहना है कि बाजार में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने का मतलब सीधे बिक्री पर असर पड़ना है। दुकानदारों के लिए हर दिन का कारोबार महत्वपूर्ण होता है। यदि लोग सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ या संभावित अव्यवस्था की आशंका के चलते बाजार आने से बचते हैं तो नुकसान की मार सबसे पहले छोटे और फुटकर व्यापारियों पर पड़ती है।
महासचिव विनय कुमार ठाकुर ने बताई व्यापारियों की परेशानी
पालिका बाजार के महासचिव विनय कुमार ठाकुर ने मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि बाजार के सभी प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि इस तरह के झंडारोहण कार्यक्रमों और प्रदर्शनों के दौरान ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका रहती है। यदि ग्राहक बाजार तक नहीं पहुंचेंगे तो दुकानदारों के कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा।
विनय कुमार ठाकुर के अनुसार पालिका बाजार में करीब 400 दुकानें हैं और यहां बड़ी संख्या में छोटे व्यापारी अपनी आजीविका चलाते हैं। ऐसे में बाजार के चारों ओर सुरक्षा का सख्त पहरा लगने और संभावित भीड़ की स्थिति में कारोबार प्रभावित होने की चिंता स्वाभाविक है। व्यापारियों की परेशानी यह है कि राजनीतिक गतिविधियों के बीच उनका रोजमर्रा का व्यवसाय कहीं पीछे न छूट जाए।
सुरक्षा भी जरूरी, लेकिन व्यापारियों की परेशानी कौन समझेगा?
कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है और किसी भी संभावित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा इंतजाम अहम हैं। दूसरी ओर बाजार में व्यापार करने वाले दुकानदारों के लिए ग्राहकों की निर्बाध आवाजाही भी उतनी ही जरूरी है। यही वजह है कि मौजूदा घटनाक्रम ने सुरक्षा और कारोबार के बीच संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी कर दी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि सियासी कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए पालिका बाजार में खरीदारी करने आने वाले लोगों की आवाजाही कैसे सुचारु रखी जाएगी। व्यापारियों को उम्मीद है कि हालात ऐसे न बनें कि राजनीतिक गतिविधियों का आर्थिक बोझ छोटे दुकानदारों को उठाना पड़े। फिलहाल पालिका बाजार में सुरक्षा का पहरा कड़ा है, व्यापारियों की निगाहें ग्राहकों की आवाजाही पर टिकी हैं और सबकी नजरें प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान बनने वाले हालात पर हैं।
Reported by: Pankaj Rai












