विदेशी डाक पार्सल से ड्रग्स की तस्करी का खेल बेनकाब, आरोपी को 10 साल की सजा

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नई दिल्ली: विदेश से आने वाले डाक पार्सलों की आड़ में नशीले पदार्थों की तस्करी का सनसनीखेज खेल आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया। ब्रिटेन फ्रांस और जर्मनी से अंतरराष्ट्रीय डाक पार्सलों के जरिए मादक पदार्थ मंगाने के मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की चंडीगढ़ क्षेत्रीय इकाई को बड़ी कानूनी सफलता मिली है। सोलन निवासी पंकज शर्मा को मादक पदार्थ रखने के मामले में दोषी करार देते हुए विशेष अदालत ने 10 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला 3 अक्टूबर 2026 को हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित विशेष न्यायाधीश-द्वितीय की अदालत ने सुनाया। आरोपी को स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 की धारा 22(ग) के तहत दोषी ठहराया गया।

ब्रिटेन से आया पार्सल और शुरू हुआ ऑपरेशन

मामले की कहानी 4 जुलाई 2023 से शुरू होती है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, चंडीगढ़ को खुफिया सूचना मिली कि ब्रिटेन से अंतरराष्ट्रीय डाक के जरिए भेजे गए एक पार्सल में मादक या मन:प्रभावी पदार्थ छिपाकर भेजे गए हैं। सूचना के बाद ब्यूरो ने कानून के तहत आवश्यक अनुमति हासिल कर नियंत्रित सुपुर्दगी की कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान ब्रिटेन से आए पार्सल की मूल सामग्री की जांच की गई, जिसमें 4.7 ग्राम कोकीन बरामद हुई। इसके बाद सोलन मुख्य डाकघर में नियंत्रित सुपुर्दगी का जाल बिछाया गया। पार्सल लेने के लिए जैसे ही पंकज शर्मा पहुंचा एनसीबी टीम ने उसे मौके पर दबोच लिया।

फ्रांस के पार्सल ने खोला तस्करी के बड़े नेटवर्क का राज

मामले में असली तस्वीर उस समय सामने आई, जब उसी दौरान पंकज शर्मा द्वारा फ्रांस से आए एक दूसरे पार्सल को भी लिया गया। जांच और तलाशी के दौरान इस पार्सल से 56.2 ग्राम एमडीएमए बरामद हुआ।एनसीबी के मुताबिक एमडीएमए की अधिसूचित वाणिज्यिक मात्रा 10 ग्राम है। ऐसे में बरामद 56.2 ग्राम एमडीएमए वाणिज्यिक मात्रा से पांच गुना से भी अधिक था। यहीं से जांच की दिशा और गंभीर हो गई। जांच एजेंसी को एक तीसरे पार्सल की जानकारी मिली, जो जर्मनी से भेजा गया था और आरोपी को ही पहुंचाया जाना था। इस पार्सल से भी 4.4 ग्राम कोकीन बरामद की गई।

तीन देशों से डाक के रास्ते ड्रग्स मंगाने का आरोप

आगे की जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर यूरोप के अलग-अलग देशों से अंतरराष्ट्रीय डाक माध्यम का इस्तेमाल कर नशीले पदार्थ मंगवा रहा था। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी से जुड़े पार्सलों ने जांच एजेंसी के सामने तस्करी के पूरे तरीके की तस्वीर पेश कर दी।एनसीबी ने मामले में विस्तृत जांच के बाद 19 दिसंबर 2023 को विशेष अदालत, सोलन के समक्ष एनडीपीएस अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत शिकायत दाखिल की।

गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने कसा शिकंजा

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपी के जानबूझकर मादक पदार्थ अपने कब्जे में रखने की बात को साबित करने के लिए कई महत्वपूर्ण साक्ष्य अदालत के सामने रखे। इनमें डाक विभाग के कर्मचारियों की गवाही, डिलीवरी से जुड़े दस्तावेज, पहचान संबंधी रिकॉर्ड, जब्ती की कार्रवाई, मालखाना रिकॉर्ड और वैज्ञानिक जांच से जुड़े साक्ष्य शामिल रहे।इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया और उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

अंतरराष्ट्रीय डाक चैनल पर एनसीबी की पैनी नजर

इस मामले में मिली सजा को एनसीबी की खुफिया सूचना आधारित कार्रवाई, वैज्ञानिक जांच और प्रभावी अभियोजन की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय डाक पार्सलों के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ एजेंसी की कार्रवाई यह संकेत देती है कि विदेश से आने वाली संदिग्ध डाक खेप भी जांच एजेंसियों की नजर से बच नहीं सकती। एनसीबी ने दोहराया है कि देश को नशामुक्त बनाने के लिए मादक पदार्थों की तस्करी और उनके नेटवर्क के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।

जनता से सहयोग की अपील

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने आम लोगों से भी नशे की तस्करी के खिलाफ सहयोग करने की अपील की है। यदि किसी व्यक्ति को मादक पदार्थों की तस्करी या उससे जुड़े किसी नेटवर्क की जानकारी मिलती है तो वह मानस राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1933 पर सूचना दे सकता है। एनसीबी के अनुसार सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

Reported by: Pankaj Rai

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