नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शनिवार को सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान हुए घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट और कई जवानों के गंभीर रूप से घायल होने के मामले में दिल्ली पुलिस अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुट गई है। वहीं, अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका पर दिल्ली पुलिस की तरफ से शांति भंग करने की भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और धारा 170 लगाई गई है। तीनों को आज मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जायेगा।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस मामले में प्राथमिकी यानी एफआईआर दर्ज की जाएगी। पुलिस उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है जिन पर पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट करने तथा उन्हें चोट पहुंचाने का आरोप है। प्रदर्शन के दौरान बने तनावपूर्ण हालात के बाद दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि पुलिसकर्मियों पर कथित हमले के मामले को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि अभी तक दर्ज होने वाली प्राथमिकी की विस्तृत जानकारी और घायल पुलिसकर्मियों की कुल संख्या का आधिकारिक ब्योरा सामने आना बाकी है।
हिरासत का आंकड़ा बढ़कर करीब 2200 तक पहुंचा
सीजेपी प्रदर्शन को लेकर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था के बीच हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या भी बढ़ी है। वरिष्ठ दिल्ली पुलिस अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली के विभिन्न इलाकों से करीब 2200 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार, शाम तक यह आंकड़ा लगभग 1300 था। जो बाद में बढ़कर करीब 2200 तक पहुंच गया।।प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग स्थानों पर की गई पुलिस कार्रवाई के बीच अधिकारियों ने बताया कि हिरासत में लिए गए नाबालिगों और महिलाओं को रिहा कर दिया गया है। हालांकि कुछ लोगों को खबर लिखे जाने तक हिरासत में किया गया जानकारी के मुताबिक इनके ऊपर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
घायल जवानों के मामले में होगी कानूनी कार्रवाई
प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों को चोटें आने की सूचना के बाद अब मामले का कानूनी पक्ष महत्वपूर्ण हो गया है। दिल्ली पुलिस उन घटनाओं की जांच और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाएगी जिनमें पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट किए जाने के आरोप हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपों घटनाक्रम और जिम्मेदार व्यक्तियों से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
राजधानी में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले पुलिसकर्मियों के घायल होने की घटना ने एक बार फिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराने का अधिकार महत्वपूर्ण है लेकिन किसी भी कथित हिंसक घटना की जांच और कार्रवाई कानून के दायरे में ही होनी चाहिए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली पुलिस के 6 जवानों को चोट लगी है। आने वाले समय में जांच और कानूनी कार्रवाई से इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।












