PoK हिंसा के बीच PTI का शक्ति प्रदर्शन, शहबाज सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू

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PTI Begin Nationwide Protest in Pakistan
PTI Begin Nationwide Protest in Pakistan

नई दिल्ली: पाकिस्तान इस समय राजनीतिक और सामाजिक संकट के बीच घिरता नजर आ रहा है. एक तरफ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में चुनाव के दौरान हिंसा और विरोध का माहौल बना हुआ है, तो दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने पूरे देश में आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है. ऐसे में सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है.

इमरान खान की रिहाई के लिए आंदोलन

PTI ने 5 अगस्त से देशभर में इमरान खान की रिहाई को लेकर प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है. पार्टी के मुताबिक, इसी दिन 2023 में इमरान खान को तोशाखाना मामले में गिरफ्तार किया गया था. अब उनकी गिरफ्तारी के तीन साल पूरे होने के मौके पर पार्टी ने बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी की है.

PTI की बैठक में रैलियों, विरोध-प्रदर्शनों और लॉन्ग मार्च जैसे विकल्पों पर चर्चा हुई. पार्टी नेताओं ने इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की सेहत को लेकर भी चिंता जताई है. इमरान फिलहाल रावलपिंडी की अडियाला जेल में सजा काट रहे हैं.

PoK में चुनाव के दौरान हिंसा

दूसरी तरफ PoK में चुनावी माहौल भी तनावपूर्ण है. दूसरे चरण के मतदान में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने 18 में से 14 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) को चार सीटें मिली. दोनों चरणों के नतीजों के बाद PML-N बहुमत के करीब पहुंच गई है.

हालांकि, मतदान के दौरान हिंसा की घटनाओं ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए. एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई. PPP ने चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया है और आगे के मतदान के बहिष्कार की चेतावनी भी दी है.

विदेशी पत्रकारों पर बढ़ी पाबंदी

इन घटनाओं के बीच पाकिस्तान सरकार ने विदेशी पत्रकारों के लिए नियम और सख्त कर दिए हैं. नए दिशा-निर्देशों के तहत इस्लामाबाद, लाहौर और कराची से बाहर रिपोर्टिंग करने के लिए पहले सरकारी अनुमति लेना जरूरी होगा.

विदेशी मीडिया के फिक्सर और प्रोडक्शन टीम भी नए नियमों के दायरे में हैं. ऐसे में पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति पर स्वतंत्र रिपोर्टिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. इस तरह एक तरफ PoK में विरोध और हिंसा है, तो दूसरी ओर इमरान समर्थकों का आंदोलन सरकार पर दबाव बढ़ा रहा है.

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