स्मार्टफोन बैन के पीछे क्या है तालिबान का डर? अफगानिस्तान में नया आदेश लागू

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Taliban Ban Smartphone
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नई दिल्ली: अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान प्रशासन ने नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आधुनिक तकनीक पर प्रहार करते हुए एक और बेहद कड़ा और अजीबोगरीब फरमान जारी किया है. नए आदेश के तहत अब सभी सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और तालिबानी मुजाहिदीनों के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. तालिबान की सैन्य अदालतों द्वारा जारी इस निर्देश में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि कोई भी कर्मचारी कार्यालय या ड्यूटी के दौरान स्मार्टफोन के साथ पकड़ा गया, तो उसका मोबाइल फोन मौके पर ही तोड़ कर दिया जाएगा. इसके साथ ही दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ इस्लामी शरिया कानूनों के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी.

सर्वोच्च नेता की लिखित अनुमति ही एकमात्र रास्ता

तालिबान के इस नए फरमान का दायरा बहुत बड़ा है. यह नियम केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि सरकार के उच्च पदस्थ अधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होगा. यदि किसी अधिकारी या मुजाहिदीन को विशेष परिस्थितियों में स्मार्टफोन रखने की आवश्यकता होती है, तो उसे इसके लिए तालिबान के सर्वोच्च कमांडर व मुख्य नेता ‘हिबातुल्लाह अखुंदजादा’ से बाकायदा लिखित मंजूरी लेनी होगी. ब्रिटिश समाचार माध्यम ‘द गार्जियन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो भी प्रसारित हुए हैं जिनमें तालिबानी अधिकारी इस नए शरिया आदेश को पढ़कर सुना रहे हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के महंगे फोन सरेआम तोड़ते दिख रहे हैं. अभी तक तालिबान के केंद्रीय प्रवक्ता की ओर से इस पर कोई औपचारिक प्रेस बयान जारी नहीं किया गया है.

सूचनाओं का लीक होना और विरोध प्रदर्शन

विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान सरकार के इस औचक फैसले के पीछे प्रशासनिक से ज्यादा राजनैतिक कारण छिपे हैं. हाल ही में अफगानिस्तान के हेरात शहर में महिलाओं और बच्चियों की नाजायज गिरफ्तारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर महिलाओं ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था. तालिबान बलों द्वारा इस प्रदर्शन को दबाने और हुई मौतों के कई वीडियो स्मार्टफोन के जरिए वायरल हो गए थे. जिससे वैश्विक मंच पर तालिबान की भारी किरकिरी हुई थी.

तालिबान को डर क्यों सता रही है?

तालिबान को यह भी गहरा डर सता रहा है कि उसके अपने ही सरकारी विभागों के कर्मचारी और मुजाहिदीन मोबाइल फोन का उपयोग करके संवेदनशील सरकारी दस्तावेज, गोपनीय बैठकें और रणनीतिक जानकारियां बाहरी दुनिया या विपक्षी गुटों को लीक कर रहे हैं. कई बार सरकार के बड़े फैसलों की खबर आधिकारिक घोषणा से पहले ही सोशल मीडिया पर तैरने लगती है. हेरात के स्थानीय कर्मचारियों ने पुष्टि की है कि उनके दफ्तरों में पिछले कई महीनों से स्मार्टफोन पर अलिखित रोक थी और कई लोगों के फोन जब्त कर अधिकारियों ने उन्हें कबाड़ में तब्दील कर दिया.

पूरे देश में लागू करने की तैयारी

वर्तमान में यह स्मार्टफोन बैन पूरे देश में एक समान रूप से लागू नहीं है, बल्कि इसे एक पायलट प्रोजेक्ट की तरह परखा जा रहा है. देश के कुछ हिस्सों में यह पाबंदी सिर्फ दफ्तरों तक सीमित है, तो वहीं कुछ कट्टरपंथी प्रांतों में इसका सीधा असर महिला स्वास्थ्यकर्मियों, कॉलेज के छात्रों और शिक्षकों पर भी दिखने लगा है. यदि इसका कोई बड़ा विरोध नहीं हुआ, तो आने वाले समय में पूरे अफगानिस्तान के भीतर स्मार्टफोन और निजी इंटरनेट के इस्तेमाल को पूरी तरह गैरकानूनी घोषित किया जा सकता है. यह कदम पहले से ही बदहाली झेल रहे अफगानिस्तान को आधुनिक दुनिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था से पूरी तरह काट देगा.

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