धार्मिक आस्था की आड़ में मासूम लोगों की गाढ़ी कमाई हड़पने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. ‘हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज’ की संस्थापक नहेरा शेख पर गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने शरीयत कानून का हवाला देकर निवेशकों से लगभग 5,978 करोड़ जुटाए और बाद में 3,000 करोड़ का भारी घोटाला किया. प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, इस पोंजी स्कीम ने देश भर में 172,000 से अधिक मुस्लिम निवेशकों को निशाना बनाया जो ब्याज-मुक्त हलाल निवेश के अवसर तलाश रहे थे.
शरीयत कानून की आड़ में बुना गया धोखे का जाल
इस्लामी मान्यताओं के अनुसार बैंकों से ब्याज कमाना वर्जित माना जाता है. इसी भावना का फ़ायदा उठाते हुए नहेरा शेख ने ‘हीरा ग्रुप’ के बैनर तले एक निवेश योजना शुरू की. निवेशकों को यह कहकर लुभाया गया कि उनके पैसे का इस्तेमाल ऐसे व्यावसायिक उपक्रमों में किया जाएगा जो पूरी तरह से शरीयत के सिद्धांतों का पालन करते हैं और जिससे 36 प्रतिशत का भारी वार्षिक मुनाफा मिलेगा. शुरुआती चरण में विश्वसनीयता हासिल करने और भरोसा बनाने के लिए, कुछ चुनिंदा निवेशकों को वास्तव में भारी रिटर्न दिया गया. इन भुगतानों से प्रभावित होकर लाखों लोगों ने अपनी जीवन भर की कमाई इस कंपनी में निवेश कर दी.
संपत्तियां जब्त
प्रवर्तन निदेशालय ने अब तक ‘हीरा ग्रुप’ और नहेरा शेख से संबंधित 400 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त की हैं. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के लिए इन संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है. इस पहल के तहत कुछ संपत्तियों की नीलामी से लगभग 122 करोड़ पहले ही प्राप्त किए जा चुके हैं. एजेंसी द्वारा नहेरा के ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान 12 लग्ज़री वाहन जिनमें BMW और Mercedes-Benz शामिल हैं. साथ ही 92 लाख नकद बरामद किए गए. इसके अलावा इस मामले के संबंध में उनके एक सहयोगी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. उस पर प्रधानमंत्री कार्यालय का अधिकारी बनकर जांच को प्रभावित करने और कार्यवाही में हस्तक्षेप करने का प्रयास करने का आरोप है. ED वर्तमान में इस वित्तीय घोटाले के सभी पहलुओं की जांच कर रहा है.
अदालतों को गुमराह करने की कोशिश
सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के आदेश के बाद नौहेरा पिछले एक महीने से फरार थीं. उन्होंने जांच एजेंसियों और अदालत दोनों को गुमराह करने की लगातार कोशिशें कीं. उन्होंने एक विशेष अदालत में एक झूठा हलफनामा भी दायर किया जिसमें दावा किया गया था कि उन्होंने हैदराबाद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने की कोशिश की थी. लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने से इनकार कर दिया. जब अदालत ने जेल प्रशासन से इस दावे की पुष्टि की. यह पूरी तरह से मनगढ़ंत निकला जिसके बाद अदालत ने एक गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया. जांच से बचने के लिए नौहेरा शेख अपनी पहचान छिपाकर गुरुग्राम के सेक्टर 45 में रह रही थीं. उन्हें ED और हरियाणा पुलिस द्वारा चलाए गए एक संयुक्त अभियान के दौरान गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के समय, वह एक किराए के मकान में छिपी हुई थीं और एक फर्जी पहचान पत्र की मदद से ‘शेख खमर जहां’ बनकर रह रही थीं.
















