नई दिल्ली: राजधानी में दिनदहाड़े करीब 19.50 लाख रुपये की लूट को अंजाम देकर फरार हुए बदमाशों को लगा था कि दिल्ली की सड़कों से निकलकर वे पुलिस की पकड़ से दूर हो जाएंगे लेकिन सीसीटीवी कैमरों एएनपीआर कैमरों और तकनीकी निगरानी ने उनकी पूरी कहानी का पीछा करना शुरू कर दिया। कुचा घासी राम से शुरू हुई रेकी जीपीओ के पास नाकाम कोशिश, रानी झांसी फ्लाईओवर पर लूट और फिर दिल्ली से उत्तर प्रदेश होते हुए मनाली तक भागने वाले आरोपियों की तलाश आखिरकार पांच गिरफ्तारियों पर जाकर थमी।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान डीसीपी निहारिका भट्ट ने बताया कि नॉर्थ जिला पुलिस ने अंतरराज्यीय तलाश के बाद पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लूट की वारदात का खुलासा किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9.90 लाख रुपये नकद और लूट के पैसों से खरीदा गया करीब एक लाख रुपये कीमत का नया आईफोन-17 प्रो बरामद किया है। मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस टीमों को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड भेजा गया है।
पहले रोडरेज, फिर फ्लाईओवर पर लूट
पुलिस के मुताबिक 30 सितंबर 2026 को मुकेश और रामेश्वर अपने पुराने लाजपत राय मार्केट स्थित कार्यालय से करीब 19.50 लाख रुपये नकद लेकर स्कूटी से करोल बाग की तरफ जा रहे थे। छत्ता रेल पार करने के बाद जीपीओ के पास दो मोटरसाइकिलों पर सवार बदमाशों ने उन्हें सड़क पर विवाद यानी रोडरेज का बहाना बनाकर रोकने की कोशिश की। मौके पर लोगों की भीड़ जुटने के कारण बदमाशों की पहली कोशिश नाकाम हो गई और वे वहां से निकल गए।
लेकिन यह अंत नहीं, बल्कि असली वारदात से पहले की एक चाल थी।
पीड़ित जब आगे बढ़े और रानी झांसी फ्लाईओवर पर सेंट स्टीफंस अस्पताल के पास पहुंचे, तभी दो मोटरसाइकिलों पर सवार चार-पांच बदमाशों ने उनकी स्कूटी को घेर लिया। आरोप है कि बदमाशों ने दोनों के साथ मारपीट की और नकदी से भरा बैग जबरन छीनकर फरार हो गए। इस संबंध में थाना कश्मीरी गेट में एफआईआर संख्या 446/26, धारा 309(4)/309(6)/3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया।
सीसीटीवी ने खोली बदमाशों की ‘फिल्म’
वारदात की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी नॉर्थ जिला निहारिका भट्ट आईपीएस के निर्देशन में थाना कश्मीरी गेट और स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीमें गठित की गईं। एसीपी कोतवाली शंकर बनर्जी के मार्गदर्शन में पहली टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर प्रशांत यादव, एसएचओ कश्मीरी गेट ने किया। वहीं एसीपी ऑपरेशन नॉर्थ विशेष धत्तरवाल के मार्गदर्शन में दूसरी टीम की कमान इंस्पेक्टर रोहित सारस्वत प्रभारी स्पेशल स्टाफ ने संभाली।
पुलिस टीमों ने घटनास्थल से लेकर आसपास के रास्तों तक लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। जांच में सामने आया कि छह लोग दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर पीड़ितों का पीछा कर रहे थे। उनकी गतिविधियों को छत्ता रेल से लेकर आईएसबीटी और तीस हजारी तक लगे कैमरों के जरिए ट्रैक किया गया।
जांच यहीं नहीं रुकी। पुलिस ने शिकायतकर्ता की दुकान के बाहर की फुटेज भी खंगाली। इसमें सामने आया कि दो संदिग्ध पहले से दुकान के बाहर मौजूद थे और बाद में पीड़ित मुकेश का कुचा घासी राम से पीछा करने लगे थे, जहां वह भुगतान लेने गया था। यानी बदमाशों ने अचानक वारदात नहीं की थी, बल्कि पहले से पूरी रेकी कर रखी थी।
मोटरसाइकिल बनी पुलिस के लिए ‘लीड’
लगातार सीसीटीवी फुटेज और एएनपीआर कैमरों के विश्लेषण के दौरान पुलिस को वारदात में इस्तेमाल एक मोटरसाइकिल का सुराग मिला। पुलिस ने उसके मालिकाना हक की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं जांच में पता चला कि मोटरसाइकिल पहले परवेज फिर अनस, उसके बाद ओमकार और अंत में आरोपी दानिश के कब्जे में पहुंची थी। तकनीकी निगरानी के जरिए दानिश की वारदात के समय घटनास्थल के आसपास मौजूदगी भी सामने आई। उसके सीडीआर और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण से पुलिस उसके साथियों तक पहुंची।
मनाली से लौटते वक्त चार दबोचे
पुलिस की लगातार कार्रवाई के दौरान 3 अक्टूबर 2026 को चार आरोपियों अभिषेक, शाकिर, सुलेमान उर्फ शाहरुख और अरुण को उस समय दबोच लिया गया, जब वे मनाली से दिल्ली लौट रहे थे। जांच के दौरान सामने आया कि वारदात के बाद आरोपी कथित तौर पर मनाली चले गए थे और वहां लूट की रकम का कुछ हिस्सा खर्च किया। दूसरी मोटरसाइकिल के मालिक सुभाष कश्यप को भी आरोपियों की निशानदेही पर गिरफ्तार कर लिया गया।
लूट के पैसों से खरीदा आईफोन भी बरामद
पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9 लाख 90 हजार रुपये की लूटी गई रकम बरामद की। इसके अलावा लूट के पैसों से खरीदा गया करीब एक लाख रुपये कीमत का नया आईफोन-17 प्रो भी बरामद किया गया।
चांदनी चौक की जानकारी से रची गई साजिश
पूछताछ में पुलिस के सामने वारदात की कथित पूरी साजिश भी सामने आई। जांच के अनुसार बृज, जो चांदनी चौक इलाके में काम करता है को शिकायतकर्ता के कार्यालय से नकदी ले जाने की जानकारी थी। आरोप है कि उसने अभिषेक के साथ मिलकर अमन और पिंटू को पीड़ित की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगाया। अमन और पिंटू ने कथित तौर पर कुचा घासी राम से पीड़ित का पीछा किया और शीशगंज गुरुद्वारा के पास उसकी पहचान अरुण और अभिषेक को बताई। इसके बाद सभी आरोपी पीड़ित के पीछे-पीछे पुराने लाजपत राय मार्केट तक पहुंचे।
जीपीओ पर पहला दांव फेल, फ्लाईओवर पर दूसरी कोशिश कामयाब
पुलिस जांच के मुताबिक बदमाशों ने कश्मीरी गेट के पास पहली बार नकदी से भरा बैग छीनने की कोशिश की, लेकिन वहां मौजूद परिस्थितियों के कारण सफल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने पीछा जारी रखा और रानी झांसी फ्लाईओवर पर पीड़ितों को घेरकर कथित रूप से मारपीट की और नकदी से भरा बैग लूट लिया।वारदात के बाद आरोपी सदर बाजार और पहाड़गंज की तरफ भागे ताकि पुलिस को चकमा दिया जा सके। बाद में लूटी गई रकम आपस में बांट ली गई। जांच के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में से सुभाष को छोड़कर बाकी आरोपी कथित तौर पर मनाली चले गए, जबकि अमन और पिंटू गिरफ्तारी से बचने के लिए नैनीताल की ओर निकल गए।
बाकी किरदारों की तलाश जारी
पुलिस अब इस पूरी साजिश में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में दबिश दे रही है। जांच टीमों का लक्ष्य न केवल फरार आरोपियों को गिरफ्तार करना है, बल्कि लूट की बाकी रकम बरामद करना और प्रत्येक आरोपी की भूमिका को पूरी तरह स्पष्ट करना भी है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अभिषेक तिवारी (21), शाकिर (26), सुलेमान उर्फ शाहरुख (23), अरुण (26) और सुभाष कश्यप (26) के रूप में हुई है। सभी आरोपी लोनी, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं। नॉर्थ जिला पुलिस की कार्रवाई ने साफ कर दिया कि अपराधी चाहे दिल्ली से निकलकर उत्तर प्रदेश पहुंचें या उत्तराखंड और मनाली तक भाग जाएं कैमरों और तकनीकी निगरानी की नजर से बचना आसान नहीं है।












