परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का बड़ा बयान, कहा– अब अमेरिका उठाए कदम

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IRAN-US WAR

नई दिल्ली: ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ समझौते की संभावना फिर से जता दी है. हालांकि तेहरान ने साफ कर दिया है कि किसी भी संभावित समझौते की शर्त अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत होगी. ऐसे समय में जब क्षेत्रीय तनाव और सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं, यह बयान कूटनीतिक स्तर पर एक अहम संकेत माना जा रहा है.

ईरानी उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने मीडिया को दिए साक्षात्कार में कहा कि अब गेंद अमेरिका के पाले में है. उन्होंने दोहराया कि यदि वाशिंगटन प्रतिबंध हटाने की दिशा में गंभीर कदम उठाता है, तो तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं तय करने को लेकर बातचीत के लिए तैयार है.

अमेरिका पर जिम्मेदारी का सवाल

तख्त-रवांची ने कहा, “यह साबित करने की जिम्मेदारी अमेरिका पर है कि वे समझौता करना चाहते हैं”. उन्होंने आगे कहा, “अगर वे ईमानदार हैं, तो मुझे यकीन है कि हम एक समझौते की ओर अग्रसर होंगे,” और संकेत दिया कि प्रतिबंधों में राहत की पेशकश होने पर परमाणु गतिविधियों पर सीमाओं पर चर्चा संभव है.

इस बीच अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि वार्ता में प्रगति की राह में ईरान ही अड़चन डाल रहा है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समझौते को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन ईरान के साथ समझौता करना “बहुत मुश्किल” है.

ओमान के बाद जिनेवा में अगला दौर

अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी की शुरुआत में ओमान में अप्रत्यक्ष वार्ता हुई थी. तख्त-रवांची ने पुष्टि की कि दूसरा दौर जिनेवा में होगा. उन्होंने शुरुआती बातचीत को “कमोबेश सकारात्मक दिशा में” बताया, हालांकि किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने को लेकर सतर्कता बरती.

यूरेनियम संवर्धन पर टकराव

ईरान ने अपने 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करने के प्रस्ताव को लचीलापन बताया है. हालांकि वाशिंगटन की ओर से “शून्य संवर्धन” की मांग दोहराई गई है. इस पर तख्त-रवांची ने स्पष्ट कहा, “शून्य संवर्धन का मुद्दा अब कोई मुद्दा नहीं है और जहां तक ईरान का सवाल है, यह अब चर्चा का विषय नहीं है”.

तेहरान का कहना है कि पूर्ण रोक परमाणु अप्रसार संधि के तहत उसके अधिकारों का उल्लंघन होगा.

मिसाइल कार्यक्रम और सुरक्षा चिंता

ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम वार्ता का हिस्सा नहीं बनेगा. तख्त-रवांची ने कहा, “जब हम पर इजरायलियों और अमेरिकियों ने हमला किया, तो हमारी मिसाइलों ने हमारी रक्षा की, तो हम अपनी रक्षात्मक क्षमताओं से खुद को वंचित करना कैसे स्वीकार कर सकते हैं?”

युद्ध की आशंका और चेतावनी

क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ने के बीच तख्त-रवांची ने चेतावनी दी कि संभावित युद्ध “दर्दनाक होगा, सभी के लिए बुरा होगा, सभी को नुकसान होगा, खासकर उन लोगों को जिन्होंने इस आक्रामकता की शुरुआत की है”.

उन्होंने आगे कहा, “अगर हमें लगता है कि यह अस्तित्व के लिए खतरा है, तो हम उसी के अनुसार जवाब देंगे,” और आगाह किया कि ऐसा परिदृश्य पूरे क्षेत्र को अव्यवस्था में धकेल सकता है.

जिनेवा वार्ता से पहले दोनों पक्षों के बीच विश्वास की स्थिति नाजुक बनी हुई है, लेकिन ईरान ने संकेत दिया है कि वह बातचीत को एक और अवसर देने को तैयार है.

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