लखनऊ: अयोध्या में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष और सनातन विरोधी ताकतों पर अब तक का सबसे करारा हमला बोला है। उन्होंने देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य के सुरक्षा तंत्र को एक ही सूत्र में पिरोते हुए कहा कि वर्ष 1947 में जब भारत का विभाजन हुआ, तब भी सनातन समाज के पास बल, बुद्धि और अपार वैभव मौजूद था। इसके बावजूद समाज केवल इसलिए पीड़ित हुआ और कटा, क्योंकि वह भाषा और जातियों के छोटे-छोटे दायरों में बंटा हुआ था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी कि इतिहास की उन गलतियों से सीख न लेना भारी पड़ सकता है, क्योंकि आज भी वही शक्तियाँ नए रूपों में समाज को विभाजित करने के कुत्सित प्रयासों में जुटी हुई हैं।
सनातन विरोधी ताकतों पर सीएम योगी का बड़ा प्रहार
अपने संबोधन के दौरान सीएम योगी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संभल और प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्ष 1526 में संभल स्थित पौराणिक हरिहर मंदिर को क्षतिग्रस्त करके वहां एक विवादित ढांचा खड़ा कर दिया गया था।
यदि उस समय संभल के निवासियों और सनातनी समाज ने एकजुट होकर उस दुस्साहस का पुरजोर प्रतिकार किया होता, तो शायद वर्ष 1528 में अयोध्या में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर को नुकसान पहुँचाने का दुस्साहस किसी आक्रांता में नहीं होता। उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय तक उपेक्षा झेलने के बाद आज संभल और अयोध्या दोनों ही ऐतिहासिक स्थलों का प्राचीन वैभव और गौरव फिर से पुनस्थापित हो रहा है।
वर्तमान परिस्थितियों की तुलना रामायण काल के पात्रों से
अयोध्या के कायाकल्प की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब यह पवित्र नगरी मूलभूत बिजली सुविधाओं के लिए तरसती थी और सरयू नदी के तटों पर अव्यवस्था का आलम था। श्रद्धालु अत्यंत विषम परिस्थितियों में स्नान करने को मजबूर थे, लेकिन आज अयोध्या एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है जहाँ त्रेतायुग जैसी भव्यता का आभास होता है।
राजनीति के वर्तमान परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने रामायण कालीन संदर्भों का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रभु श्री राम के राजतिलक के समय विघ्न डालने के लिए मंथरा और कैकई जैसे पात्र सामने आए थे, ठीक उसी तरह आज भी कुछ शक्तियाँ देश के विकास और सनातन के उत्थान को रोकने का प्रयास कर रही हैं। केवल चेहरे बदले हैं, नीतियाँ और इरादे आज भी वही हैं।
रामभक्तों पर रुख बदलने वालों को पहचानने की सलाह
अतीत के आंदोलनों की याद दिलाते हुए मुख्यमंत्री ने उन राजनीतिक दलों पर तीखा तंज कसा जो अतीत में राम जन्मभूमि आंदोलन का खुलकर विरोध करते थे। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी रामभक्तों पर लाठी और गोलियाँ चलाने में जरा सा भी संकोच नहीं करते थे और जिन्होंने अदालत में पूरी कानूनी ताकत इस बात के लिए लगा दी थी कि फैसला मंदिर के पक्ष में न आए, वे ही लोग आज राजनीतिक लाभ के लिए राम-राम जप रहे हैं। सीएम योगी ने जनता को आगाह करते हुए कहा कि ऐसे छद्म वेशधारी ‘कालनेमियों’ को पहचानना अत्यंत आवश्यक है, जो अपने अतीत के कृत्यों पर पर्दा डालकर आज रामभक्तों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।
संभल हिंसा और पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों पर निशाना
संभल में हाल में हुए अदालती सर्वे और तत्पश्चात हुई हिंसा का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि दशकों तक इस क्षेत्र को विकास से वंचित रखा गया। तीस वर्षों तक जिला मुख्यालय तक नहीं बनने दिया गया। जब न्यायालय के आदेश पर हरिहर मंदिर परिसर का वैज्ञानिक सर्वे प्रारंभ हुआ, तो कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर उपद्रव भड़काया, जिसका सीधा निशाना पुलिस प्रशासन और निर्दोष हिंदू नागरिक थे। उन्होंने बताया कि पुलिस की सख्त और त्वरित कार्रवाई से स्थिति पर नियंत्रण पाया गया। उन्होंने इतिहास के काले पन्नों को पलटते हुए याद दिलाया कि 1970 के दशक में हुए दंगों में दर्जनों निर्दोष हिंदुओं को आग के हवाले कर दिया गया था, लेकिन 1996 में सपा सरकार ने उन सभी संगीन मुकदमों को वापस लेकर दोषियों को बचा लिया था।
विभाजन की विभीषिका और मजबूत नेतृत्व का संदेश
अपने भाषण के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री ने 1947 के विभाजन के दर्द को बयां करते हुए कहा कि उस समय केवल भौगोलिक सीमाएं नहीं टूटी थीं, बल्कि आदिकाल से एक सनातन इकाई के रूप में विद्यमान भारतवर्ष का हृदय विभाजित हुआ था। उन्होंने कहा कि यदि आजादी के समय देश की बागडोर नरेंद्र मोदी या सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे दृढ इच्छाशक्ति वाले नेतृत्व के हाथों में होती, तो निर्दोष नागरिकों का वह भीषण कत्लेआम कभी नहीं होता। जो लोग कश्मीर से धारा 370 के हटने और देश से नक्सलवाद के खात्मे पर पीड़ा महसूस करते हैं, वे ही आज देश को जाति और भाषा के नाम पर बांटने का षड्यंत्र रच रहे हैं। इनसे सतर्क रहकर राष्ट्र की अखंडता को अक्षुण्ण रखना ही आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।











