मिस्र के जहाज पर हूती हमला, 3 पाकिस्तानी समेत 4 की मौत, 10 लोग घायल

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Houthi attack on Egyptian cargo ship
Houthi attack on Egyptian cargo ship

नई दिल्ली: ईरान युद्ध के बीच लाल सागर में समुद्री तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. यमन के बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने मिस्र के कार्गो जहाज ‘तिहामा’ को निशाना बनाया. हमले में चालक दल के चार सदस्यों की मौत हो गई. 

मृतकों में तीन पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक शामिल हैं। घटना में 10 अन्य लोग घायल बताए गए हैं. 28 फरवरी से शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद हूती हमले में किसी जहाज के चालक दल की मौत का यह पहला बड़ा मामला बताया जा रहा है.

बाब अल-मंदेब में कैसे हुआ हमला?

यमन के परिवहन मंत्रालय ने मंगलवार को घटना की पुष्टि की. अधिकारियों के मुताबिक, बाब अल-मंदेब में हमला होने के बाद जहाज पर मौजूद चालक दल का नियंत्रण खत्म हो गया. इसके बाद जहाज पर सवार चार लोगों की जान चली गई.

यमन के तटरक्षक बल के अनुसार, बचाव दल के मौके पर पहुंचने के बाद भी स्थिति शांत नहीं हुई. हूती लड़ाकों की ओर से कथित तौर पर दोबारा हमला किया गया। इस दौरान हूती विरोधी ‘नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज’ के दो बचावकर्मियों की भी मौत हो गई. कुल 10 लोग घायल हुए हैं. इनमें जहाज के सात क्रू सदस्य, तटरक्षक बल के दो जवान और नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज का एक सदस्य शामिल है.

पेरिम द्वीप के पास जहाज को बनाया निशाना

यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के मुताबिक, बाब अल-मंदेब के पास एक जहाज पर अज्ञात वस्तु से हमला हुआ था. समुद्री सुरक्षा कंपनी एंब्रे के अनुसार, घटना के समय जहाज पेरिम द्वीप के उत्तर-पूर्वी हिस्से में लंगर डाले हुए था. बाद में जहाज की तस्वीरों के आधार पर इसकी पहचान ‘तिहामा’ के रूप में की गई. रिपोर्टों के मुताबिक, जहाज मिस्र की कंपनियों द्वारा संचालित था.

लाल सागर में शिपिंग पर असर

इस हमले के बाद लाल सागर और बाब अल-मंदेब में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है. हूती विद्रोहियों ने इससे पहले सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया था. लगातार हमलों और खतरे के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है.

दूसरी ओर, होर्मुज स्ट्रेट में भी तनाव का असर दिख रहा है. ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष के कारण यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. इससे वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है.

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