नई दिल्ली: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने देशभर में प्रदर्शन और इस्लामाबाद तक मार्च करने का ऐलान किया है। इस ऐलान के बाद सरकार सतर्क हो गई है और राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इस्लामाबाद को लगभग पूरी तरह सील कर दिया है। राजधानी में आने वाले सभी बड़े रास्तों पर 1000 से ज्यादा कंटेनर लगा दिए गए हैं। इसके साथ ही कई कंटेनरों पर नुकीले कांटे भी लगाए गए हैं। पुलों पर रेत की बोरियां रखी गई हैं और मुख्य हाईवे को बंद कर दिया गया है। शहर में किसी भी तरह की सभा या भीड़ जुटाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।
22 हजार पुलिसकर्मियों को किया गया तैनात
सुरक्षा के लिए करीब 22 हजार पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है। बता दें, सिर्फ इस्लामाबाद ही नहीं, खैबर पख्तूनख्वा में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पेशावर को इस्लामाबाद से जोड़ने वाले मुख्य हाईवे को भी बंद किया गया है ताकि प्रदर्शनकारियों को राजधानी आने से रोका जा सके वहीं खबर है कि इस सख्त नाकेबंदी से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जरूरी सामानों की सप्लाई पर असर पड़ा है और कारोबार ठप पड़ गया है। स्थानीय लोग और व्यापारी सरकार के इस फैसले से काफी नाराज हैं। उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
क्यों किया जा रहा प्रदर्शन
दरअसल, यह पूरा विरोध इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर किया जा रहा है। इमरान खान अगस्त 2023 से कई मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल में बंद हैं। PTI का आरोप है कि जेल में उनके साथ ठीक व्यवहार नहीं हो रहा है और उनकी सेहत को लेकर भी चिंता बनी हुई है। पहले यह मार्च 27 सितंबर से शुरू होने वाला था, लेकिन शुक्रवार को PTI ने तारीख बदलकर 4 अक्टूबर कर दी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि तारीख आगे बढ़ाने से सरकार पर राजनीतिक दबाव और ज्यादा बनेगा।
दूसरी तरफ, प्रदर्शन से पहले इमरान खान के परिवार पर भी शिकंजा कसा गया है। उनकी बहन अलीमा खान के बाद उजमा खान और नूरीन नियाजी को भी हिरासत में ले लिया गया है। तीनों को पंजाब मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर ऑर्डिनेंस के तहत 30 दिनों की हिरासत में भेजा गया है।












