नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली को स्वच्छ और सुंदर बनाने की दिशा में नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) ने सफाई व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की पहल तेज कर दी है। अब सड़कों, बाजारों और संकरी गलियों में बिखरी प्लास्टिक की बोतलें, कागज के कप, रैपर, पत्तियां और हल्का कचरा उठाने के लिए सफाई कर्मचारियों को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। एमसीडी ने मंगलवार को केंद्रीय उत्तरी क्षेत्र (केशवपुरम जोन) के आठ वार्डों में बैटरी से चलने वाली आधुनिक कूड़ा संग्रहण मशीनों का परीक्षण शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत दिल्ली के सभी 250 वार्डों में कुल 1,000 मशीनें उतारने की तैयारी है। यानी प्रत्येक वार्ड को चार मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे स्थानीय स्तर पर सफाई व्यवस्था को मजबूत करने और कचरा संग्रहण की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी।
वैक्यूम तकनीक से हल्का कचरा आसानी से उठेगा
इन मशीनों की सबसे बड़ी खासियत इनकी वैक्यूम तकनीक है। इनमें विशेष सक्शन पाइप लगाया गया है, जिसके जरिए सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर फैला हल्का कचरा खींचकर एकत्र किया जा सकेगा। प्लास्टिक की खाली बोतलें, कागज के कप, खाद्य पदार्थों के रैपर, सूखी पत्तियां और अन्य छोटे कचरे को आसानी से उठाया जा सकेगा। खास बात यह है कि जिन संकरी गलियों, भीड़भाड़ वाले बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में बड़ी सड़क सफाई मशीनें नहीं पहुंच पातीं, वहां ये छोटी और बैटरी चालित मशीनें कारगर साबित हो सकती हैं। इससे सफाई कर्मचारियों का श्रम कम होगा और कम समय में अधिक क्षेत्र की सफाई संभव हो सकेगी।
मुख्यमंत्री ने किया था उद्घाटन, अब परीक्षण
गौरतलब है कि इन मशीनों का उद्घाटन दिल्ली की मुख्यमंत्री ने 17 अक्टूबर 2026 को किया था। अब आठ वार्डों में शुरू हुआ परीक्षण इस योजना को जमीन पर उतारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। परीक्षण के दौरान इनके संचालन और उपयोगिता का आकलन किया जाएगा। एमसीडी की इस पहल से उम्मीद है कि दिल्ली की गलियों और बाजारों में बिखरे कचरे पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। यदि परीक्षण सफल रहता है तो 1,000 मशीनों की तैनाती से राजधानी की सफाई व्यवस्था को नई तकनीकी ताकत मिलेगी।












