इजरायल में नेतन्याहू की कुर्सी पर मंडराया खतरा, अरब पार्टियां बिगाड़ेंगी चुनावी गणित, बन सकती हैं किंगमेकर

0
12

नई दिल्ली: इजरायल में मंगलवार को हुए आम चुनाव में अरब पार्टियों ने सबको चौंका दिया है। देश की दो मुख्य अरब पार्टियों मिलकर करीब 19 सीटें जीतती दिख रही हैं, जो संसद में उनकी मौजूदा ताकत से लगभग दोगुना है। इस शानदार प्रदर्शन के  बाद अब सरकार बनाने में अरब पार्टियों की भूमिका निर्णायत हो सकती है।

रूझानों के मुताबिक, यूसुफ जबरीन के नेतृत्व वाला जॉइंट लिस्ट गठबंधन और मंसूर अब्बास की अगुवाई वाली राम (Ra’am) पार्टी को बड़ी बढ़त मिली है। जॉइंट लिस्ट को अकेले 12 सीटें मिलने का अनुमान है। दोनों मिलकर 19 सीटों के करीब पहुंट रही हैं, जो इजरायली राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

सरकार को बाहर से समर्थन का संकेत

जॉइंट लिस्ट के नेता यूसुफ जबरीन ने कहा कि उनकी पार्टी इस ताकत का इस्तेमाल बेंजामिन नेतन्याहू सरकार को हटाने के लिए करेगी। हालांकि उन्होंने साफ किया कि वे गाजा में सैन्य कार्रवाई और दक्षिणी लेबनान पर कब्जे के मुद्दे पर आइजनकोट के रुख से सहमत नहीं हैं, इसलिए सीधे सरकार में शामिल नहीं होंगे। लेकिन वे आइजनकोट गठबंधन को बाहर से समर्थन देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मांग अरब समुदाय के अधिकारों की रक्षा और समानता को बढ़ावा देना है।

दूसरी तरफ राम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने सरकार में शामिल होने के संकेत दिए हैं। 52 वर्षीय दंत चिकित्सक और पूर्व सांसद अब्बास ने अपनी पार्टी को ज्यादा स्वीकार्य बनाने के लिए लिस्ट में एक यहूदी पूर्व पुलिस अधिकारी को भी जगह दी थी। उन्होंने कहा कि आइजनकोट खेमे के वरिष्ठ नेताओं से पहले ही संभावित समझौते पर बात हुई है। यहां तक कि दक्षिणपंथी खेमे के एक बड़े नेता ने भी उनसे संपर्क किया था।

नेतन्याहू और आइजनकोट ने अरब गठबंधन से किया इनकार

हालांकि राह आसान नहीं है। आइजनकोट ने प्रचार के दौरान अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने से इनकार किया था। उनका कहना था कि दोनों पक्षों में साझा मूल्य नहीं हैं। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने भी कहा है कि वह अरब पार्टियों से कोई बातचीत नहीं करेगी। बता दें कि इजरायस की कुल आबादी में करीब 21 लाख अरब नागरिक हैं, जो 20 फिसदी हैं। देश के 20 फीसदी से ज्यादा डॉक्टर और एक चौथाई नर्सें अरब समुदाय से हैं। 2021 में राम पार्टी पहली बार बेनेट-लैपिड सरकार में शामिल हुई थी। अब एक बार फिर अरब पार्टियां किंगमेकर बनकर उभरी हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here