वृंदावन: कार्तिक मास में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए यमुना में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। स्नान के दौरान होने वाले हादसों पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने केशीघाट पर एसडीआरएफ की अस्थायी चौकी स्थापित कर दी है। यहां 32 बचावकर्मियों की तैनाती की गई है। एसडीआरएफ की टीम मोटरबोट के जरिए यमुना में लगातार निगरानी रखेगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
यमुना घाटों पर 32 SDRF जवानों की मुस्तैदी
कार्तिक मास में वृंदावन में नियम-सेवा करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालु पूरे महीने यमुना स्नान और वृंदावन की परिक्रमा का संकल्प लेकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, गोपाष्टमी, अक्षय नवमी, देवोत्थान एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या में और इजाफा होता है। ऐसे में यमुना के घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मोटरबोट से गश्त
यमुना में डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए एसडीआरएफ के 32 जवानों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें दो उपनिरीक्षक, 26 कांस्टेबल और चार बोट चालक शामिल हैं। टीम की तीन मोटरबोट वाराह घाट से देवरहा बाबा घाट तक लगातार गश्त करेंगी। इसके जरिए यमुना में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं पर नजर रखी जाएगी। किसी व्यक्ति के डूबने या अन्य आपात स्थिति की सूचना मिलने पर बचाव दल तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करेगा।
केशीघाट पर SDRF की अस्थायी चौकी तैनात
गौरतलब है कि अप्रैल माह में वृंदावन में श्रद्धालुओं से भरी नाव यमुना में डूब गई थी। इस हादसे में 16 यात्रियों की मौत हो गई थी। घटना के बाद यमुना में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने वृंदावन में एसडीआरएफ की टीम तैनात करने का निर्णय लिया था। सावन के महीने में भी टीम को मुस्तैद रखा गया था। अब कार्तिक मास में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से यमुना स्नान और धार्मिक अनुष्ठान कर सकें।
Reported By: Prem Kaushik












