फ्रांस में हिंसक प्रदर्शन के बाद तनाव, पेरिस समेत 5 शहरों में कर्फ्यू; आपातकाल की आशंका

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पेरिस के मशहूर लूव्र संग्रहालय के कांच के पिरामिड के सामने जब प्रदर्शनकारी जमा हो गए, तो दुनिया भर से आए पर्यटक हैरान रह गए। फ्रांस में महंगाई के खिलाफ भड़का गुस्सा हाल के वर्षों की सबसे भीषण सड़क हिंसा में बदल चुका है। सोमवार को सरकार ने पेरिस और उत्तरी फ्रांस के चार अन्य शहरों में आंशिक कर्फ्यू का ऐलान कर दिया। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के उत्तराधिकारी के चुनाव से छह महीने पहले भड़की इस अशांति के बीच प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने आपातकाल लगाने की संभावना से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने “नियंत्रण खोया” है और वे सार्वजनिक व्यवस्था बहाल करने के लिए पूरी तरह दृढ़ हैं।

आयोजकों ने अगले शनिवार को विरोध प्रदर्शनों के नए दौर का आह्वान किया है। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि व्यवसायों की सुरक्षा के लिए लिले समेत चार उत्तरी शहरों में सोमवार और मंगलवार को रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक आंशिक कर्फ्यू रहेगा। पेरिस में सोमवार रात 9 बजे से प्रदर्शनों पर आंशिक प्रतिबंध लगाया गया है। मार्सिले में दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगा दी गई।

शांतिपूर्ण आंदोलन से हिंसा तक

शनिवार को देशभर में करीब पांच लाख लोग बढ़ती जीवन-यापन लागत के खिलाफ सड़कों पर उतरे। यह चार हफ्ते के विरोध का नतीजा था, जिसकी शुरुआत हाई स्कूलों में बेहतर हालात की मांग करने वाले छात्रों ने की थी। कई जगह शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक हो गए। नकाबपोश समूहों ने पुलिस पर हमला किया, टाउन हॉल और सरकारी इमारतों में तोड़फोड़ व आगजनी की, दुकानें लूटीं और कारों, साइकिलों व स्कूटरों को आग लगा दी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2,500 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए और सुरक्षा बलों के करीब 1,000 जवान घायल हुए। न्याय मंत्री गेराल्ड डारमैनिन ने बताया कि 2,330 से अधिक लोग पुलिस हिरासत में लिए गए, जिनमें 70 प्रतिशत वयस्क थे। लघु व्यवसाय मंत्री सर्ज पापिन के अनुसार, कम से कम 3,000 दुकानें प्रभावित हुईं और करोड़ों यूरो का नुकसान हुआ। प्रदर्शनकारी भी घायल हुए, जिनमें एक का हाथ पुलिस के भीड़ नियंत्रण ग्रेनेड से उड़ गया।

मैक्रों ने करीब 60,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बावजूद सरकारी प्रतिक्रिया में कमियां मानीं। रविवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में उन्होंने “बेलगाम” हिंसा की कड़ी निंदा की। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया, लेकिन मैक्रों ने उसे स्वीकार नहीं किया। डिजिटल मंत्री ऐनी ले हेनानफ ने ऑनलाइन पुनर्विक्रय प्लेटफॉर्मों से लूट के सामान की लिस्टिंग हटाने को कहा। उन्होंने विंटेड और ईबे जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों को तलब किया। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, अमेजन, लेबोनकॉइन, मेटा और टिकटॉक के प्रतिनिधि भी बुलाए गए।

लूव्र बंद, यूरोप में भी असर

सोमवार को करीब एक दर्जन प्रदर्शनकारियों ने लूव्र के प्रवेश द्वार को घेर लिया और संग्रहालय बंद करना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया के 73 वर्षीय पर्यटक पैट बोलैंड ने एएफपी से कहा कि वे इसमें शामिल नहीं होना चाहते।

फ्रांस में मार्च से डीजल करीब 40 प्रतिशत और पेट्रोल 25 प्रतिशत महंगा हुआ है, जबकि पांच साल में खाने-पीने की चीजें 25 प्रतिशत महंगी हुई हैं। यह अशांति अप्रैल-मई के राष्ट्रपति चुनाव से पहले भड़की है। धुर दक्षिणपंथी उम्मीदवार मरीन ले पेन सर्वेक्षणों में आगे हैं। सरकार ने अति-वामपंथी समूहों पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है, ताकि जीन-ल्यूक मेलेंचोन की संभावनाएं बढ़ें।

यूरोपीय संघ ने हिंसा को “अस्वीकार्य” बताया, पर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा की बात भी कही। जर्मनी ने यात्रा सलाह अपडेट की और चीन ने नागरिकों को सावधान रहने को कहा। मिलान में झड़पें हुईं, ब्रुसेल्स और लीज में पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछार की, जबकि मैड्रिड, लिस्बन और पोर्टो में आवास महंगाई के खिलाफ शिविर लगे हैं।

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