यूपी समेत 17 राज्यों में वोटर लिस्ट सुधार अभियान का ऐलान, चुनाव आयोग ने जारी किया पूरा कार्यक्रम

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मतदाता सूची में किसी योग्य नागरिक का नाम छूटने या गलत जानकारी दर्ज होने से मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयोग ने नई प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पंजाब सहित 17 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी एसएसआर कराया जाएगा।

आयोग ने संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नए मतदाताओं का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए और सूची में मौजूद गलतियों को दूर किया जाए। इस अभियान में पहली बार वोट डालने की उम्र तक पहुंच रहे युवाओं के साथ उन नागरिकों पर भी ध्यान दिया जाएगा, जो पात्र होने के बावजूद अब तक मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं।

12 नवंबर को जारी होगी प्रारंभिक मतदाता सूची

निर्वाचन आयोग के 15 अक्टूबर 2026 के निर्देशों के मुताबिक, इस अभियान में एक जनवरी 2027 को मुख्य पात्रता तिथि माना जाएगा। सूची में शामिल राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। इसके अलावा अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में भी यह प्रक्रिया चलेगी।

आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, मतदान केंद्रों की व्यवस्था और पुनर्गठन का काम दो नवंबर तक पूरा किया जाना है। इसके बाद 12 नवंबर को प्रारंभिक मतदाता सूची प्रकाशित होगी। मतदाता 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक नाम जोड़ने, विवरण ठीक कराने या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज करने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इन दावों और आपत्तियों का निपटारा 28 दिसंबर तक किया जाएगा। इसके बाद चार जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची जारी करने की योजना है।

युवाओं को मिलेगा नाम जुड़वाने का अवसर

जो नागरिक मतदाता बनने की निर्धारित शर्तें पूरी करते हैं, लेकिन उनका नाम सूची में नहीं है, वे पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। आयोग ने एक जनवरी 2027 के अलावा एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्टूबर 2027 की आगामी पात्रता तिथियों के लिए भी अग्रिम आवेदन लेने की व्यवस्था की है। इन आवेदनों पर संबंधित तिमाही में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे पात्रता हासिल करने वाले युवाओं को मतदाता बनने का अवसर मिल सकेगा।

नाम जोड़ने और सुधार के लिए कौन-से फॉर्म?

नया नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जाएगा। विदेश में रहने वाले भारतीय मतदाताओं के लिए फॉर्म-6ए निर्धारित है। किसी व्यक्ति के नाम को सूची में शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने या नाम हटाने की मांग के लिए फॉर्म-7 भरा जा सकता है। वहीं, पता बदलवाने, व्यक्तिगत विवरण में सुधार, मतदाता पहचान पत्र बदलवाने या दिव्यांग मतदाता के रूप में पहचान दर्ज कराने के लिए फॉर्म-8 का उपयोग किया जाएगा।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन में आधार संख्या देना स्वैच्छिक रहेगा। केवल आधार उपलब्ध नहीं कराने के कारण किसी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में जोड़ने से इनकार नहीं किया जा सकता और न ही इसी आधार पर किसी मौजूदा प्रविष्टि को हटाया जा सकता है। नागरिक निर्वाचन आयोग के वोटर सर्विस पोर्टल और ईसीआईनेट ऐप के माध्यम से भी आवेदन कर सकेंगे।

नाम हटाने से पहले होगी अतिरिक्त जांच

मतदाता सूची से गलत तरीके से नाम हटाए जाने की आशंका दूर करने के लिए आयोग ने सत्यापन के विशेष नियम बनाए हैं। यदि किसी मतदान केंद्र की कुल मतदाता संख्या के दो प्रतिशत से अधिक नाम हटाने का प्रस्ताव आता है, तो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से दोबारा जांच करनी होगी। यदि कोई व्यक्ति पांच से अधिक मामलों में आपत्ति दर्ज कराता है, तो संबंधित मामलों की भी अलग से जांच की जाएगी।

मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके लोगों और दोहरी प्रविष्टियों के मामलों में भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी होगा। जहां किसी का नाम हटाने का प्रस्ताव होगा, वहां नियमों के अनुसार संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।

मतदान केंद्रों की व्यवस्था में भी बदलाव

आयोग ने सामान्य परिस्थितियों में एक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की संख्या 1,200 तक सीमित रखने का निर्देश दिया है। नए केंद्र बनाने या मौजूदा केंद्रों में बदलाव से पहले मौके पर निरीक्षण किया जाएगा। केंद्रों की सीमाएं स्पष्ट रखने और परिवार के सदस्यों के नाम एक ही अनुभाग में रखने पर भी जोर दिया गया है। प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से सलाह ली जाएगी।

महिलाओं, ट्रांसजेंडर नागरिकों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, अनुसूचित जनजातियों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के पंजीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और कई अन्य राज्यों के लिए कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए अलग कार्यक्रम जारी होगा। आयोग का लक्ष्य पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना और गलत प्रविष्टियों को नियमानुसार दुरुस्त करना है।

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