फोर्ट हुड हमले के दोषी की सजा पर ट्रंप का यू-टर्न, फायरिंग स्क्वॉड की कार्रवाई कैमरे पर नहीं दिखेगी

0
7

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि सेना के पूर्व मेजर निदाल मलिक हसन को दी जाने वाली मौत की सजा की लाइव स्ट्रीमिंग नहीं होगी। हसन को वर्ष 2009 में टेक्सास स्थित फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर गोलीबारी के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस हमले में 13 लोगों की जान गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। ट्रंप ने अपने संदेश में घटना को अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता से जोड़ते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि संघीय जांच ब्यूरो यानी FBI को हसन और कट्टरपंथी मौलवी अनवर अल-अवलाकी के बीच इलेक्ट्रॉनिक संवाद की जानकारी मिली थी, लेकिन उस समय खतरे का आकलन पर्याप्त गंभीरता से नहीं किया गया।

ट्रंप ने पहले सजा के सार्वजनिक प्रसारण को आतंकवाद के खिलाफ कठोर संदेश देने का संभावित माध्यम बताया था, लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट किया है कि इसे कैमरे पर नहीं दिखाया जाएगा। पीड़ित परिवारों के करीबी सदस्यों को निर्धारित नियमों के अनुसार सजा देखने की अनुमति मिल सकती है।

ट्रंप ने खुफिया जांच पर फिर उठाए सवाल

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि हसन से जुड़े संचार की जांच के दौरान FBI की आतंकवाद-रोधी इकाइयों ने उस समय ऐसा निष्कर्ष निकाला था कि उसके ईमेल से तत्काल खतरे का संकेत नहीं मिलता। राष्ट्रपति ने इस आकलन को पिछली सरकार की बड़ी चूक के रूप में पेश किया। हालांकि, उनके बयान में किए गए दावों और उस समय की जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है। किसी खुफिया सूचना का मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित एजेंसियों के पास हमले को रोकने के लिए पर्याप्त प्रमाण या कानूनी आधार भी मौजूद था।

फोर्ट हुड की गोलीबारी ने अमेरिका को झकझोर दिया था

नवंबर 2009 में फोर्ट हुड के सैन्य परिसर में हुई गोलीबारी ने अमेरिकी सेना और सुरक्षा एजेंसियों को गंभीर सवालों के घेरे में ला दिया था। हसन उस समय अमेरिकी सेना में मेजर और मनोचिकित्सक के रूप में कार्यरत था। उसने सैन्य परिसर में गोलीबारी की, जिसमें 13 लोगों की मृत्यु हुई और 30 से अधिक लोग घायल हुए। इस घटना के बाद सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, कर्मचारियों से संबंधित चेतावनियों और खुफिया सूचनाओं के मूल्यांकन पर व्यापक चर्चा हुई।

तीन दिसंबर को प्रस्तावित है मृत्युदंड

प्रस्तुत रिपोर्ट के मुताबिक हसन को तीन दिसंबर 2026 को फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मृत्युदंड दिया जाना निर्धारित है। ट्रंप ने कहा कि इस कार्रवाई का सार्वजनिक सीधा प्रसारण नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ितों के परिवारों के करीबी सदस्य चाहें तो निर्धारित व्यवस्था के तहत वहां मौजूद रहकर इसे देख सकेंगे। सजा की तारीख और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं के बारे में अंतिम स्थिति संबंधित अमेरिकी अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी से ही स्पष्ट होगी।

फैसला बना बहस का विषय

ट्रंप के बयान ने एक बार फिर आतंकवाद के दोषियों को दंडित करने, सार्वजनिक प्रसारण की सीमाओं और पीड़ित परिवारों के अधिकारों पर चर्चा शुरू कर दी है। एक ओर राष्ट्रपति ने कार्रवाई को कड़ा संदेश देने से जोड़ा, वहीं दूसरी ओर उन्होंने प्रसारण नहीं करने का फैसला बताया। इस मामले में अहम प्रश्न यह है कि न्यायिक दंड की प्रक्रिया और उसके सार्वजनिक प्रदर्शन के बीच सीमा कहां तय की जानी चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here