दुबई की उड़ान से पहले ₹5 हजार, फिर पासपोर्ट और अरबी दस्तावेज, 2600 दिरहम का कर्ज

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मोनिका के परिवार के मुताबिक विदेश में नौकरी का प्रस्ताव मिलने के बाद उसने 22 अप्रैल को ₹5 हजार भेजे थे। उसे भरोसा दिलाया गया था कि दुबई में नौकरी मिलेगी और रहने-खाने की व्यवस्था भी होगी। इसी भरोसे के साथ मोनिका ने विदेश जाने की तैयारी शुरू की। परिवार को उस समय अंदाजा नहीं था कि आगे चलकर यही सफर उसके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। मोनिका 5 मई को दिल्ली से दुबई के लिए रवाना हुई।

अगले दिन यानी 6 मई को वह शारजाह पहुंची। परिवार की शिकायत के अनुसार, एयरपोर्ट से बाहर निकलने के बाद उसे लेने के लिए एक वाहन आया। आरोप है कि इसी दौरान उसका पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया गया। पासपोर्ट चले जाने के बाद विदेश में उसकी स्थिति और अधिक असहज हो गई।

7 मई को अरबी दस्तावेजों पर साइन कराने का आरोप

अगले दिन मोनिका को अजमान स्थित कार्यालय ले जाने की बात सामने आई। परिवार का आरोप है कि वहां उससे अरबी भाषा में लिखे कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अंगूठा लगवाया गया। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मोनिका अरबी भाषा नहीं समझती थी, तो उसे दस्तावेजों में क्या लिखा था और किस बात पर हस्ताक्षर कराए गए, इसकी जानकारी कैसे मिली।

मोबाइल चैट डिलीट करने का भी लगाया गया आरोप

परिवार की शिकायत में मोबाइल फोन से बातचीत मिटाए जाने का भी आरोप लगाया गया है। आरोप के मुताबिक मोनिका के मोबाइल से कुछ WhatsApp चैट डिलीट कर दी गईं। अगर जांच में यह आरोप सही साबित होता है, तो इससे पहले हुई बातचीत और नौकरी के वादे से जुड़े डिजिटल सबूतों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

अचानक सामने आया 2600 दिरहम का कथित कर्ज

मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब मोनिका को कथित तौर पर बताया गया कि उस पर 2600 दिरहम का कर्ज है। परिवार के मुताबिक उसे रकम चुकाने के लिए कहा गया और भुगतान नहीं करने पर जेल भेजने की धमकी भी दी गई। सवाल यह है कि आखिर यह कर्ज किस आधार पर बनाया गया और जिस दस्तावेज के आधार पर रकम मांगी गई, उसमें क्या लिखा था।

नौकरी के बजाय घरेलू काम कराने का भी आरोप

परिवार का आरोप है कि विदेश में नौकरी का भरोसा देकर मोनिका को घरेलू कामों में लगा दिया गया। उससे कथित तौर पर सफाई, बर्तन और दूसरे घरेलू काम करवाए गए। अब परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता मोनिका की सुरक्षित वापसी है। मामले की जांच के साथ यह भी पता लगाना जरूरी है कि उसे विदेश भेजने से लेकर वहां पहुंचने तक किन लोगों की भूमिका रही।

अब जांच में सामने आएगा पूरा सच

मोनिका के परिवार की शिकायत के आधार पर मामले में जांच आगे बढ़ रही है। फिलहाल पासपोर्ट कब्जे में लेने, दस्तावेजों पर दबाव में हस्ताक्षर कराने, चैट डिलीट करने और 2600 दिरहम के कथित कर्ज से जुड़े आरोपों की सच्चाई जांच का विषय है। इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नौकरी का भरोसा आखिर कैसे ऐसे हालात में बदल गया, जहां मोनिका के लिए वापस लौटना भी मुश्किल हो गया।

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