चीन से दूरी, भारत से नजदीकी, बालेन शाह के बदले रुख के पीछे क्या है नेपाल की नई रणनीति?

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नई दिल्ली: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह अगले महीने भारत दौरे पर आ सकते हैं। नवंबर के तीसरे या चौथे सप्ताह में उनकी भारत यात्रा की प्रबल संभावना जताई जा रही है। मार्च में प्रधानमंत्री का पदभार संभालने के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा होगी, जो चीन की बजाय भारत की हो रही है, जिसे कूटनीतिक तौर पर काफी अहम माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, बालेन शाह की यह यात्रा तीन दिवसीय होगी और इसका मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है। हालांकि एक उच्च-स्तरीय राजनयिक सूत्र का कहना है कि अभी आधिकारिक तारीखों पर अंतिम मुहर लगना बाकी है।

पीएम मोदी से करेंगे द्विपक्षीय वार्ता

अपने भारत दौरे के दौरान बालेन शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। इसके अलावा वह भारत के कई वरिष्ठ मंत्रियों से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों और MoU पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

बता दें, कि पीएम मोदी ने शाह को शपथ ग्रहण के तुरंत बाद ही भारत आने का न्योता दिया था। इससे पहले बालेन शाह सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क गए थे, जहां उन्होंने नेपाल में आई बाढ़ के दौरान भारत की मदद के लिए आभार भी जताया था। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने इस प्रस्तावित दौरे को सही समय पर उठाया गया कदम बताया है।

इन परियोजनाओं पर लग सकती है मुहर

इस दौरे को लेकर दोनों देशों के बीच तैयारियां तेज हो गई हैं। भारत और नेपाल ने उन परियोजनाओं की सूची साझा की है जिनका उद्घाटन इस यात्रा के दौरान हो सकता है। इनमें कावरेपलानचोक के पनौती में नेपाल पुलिस अकादमी, दारचुला में एक पुल, भैरहवा में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट और महाकाली नदी पर एक मोटरेबल पुल शामिल है।

इसके साथ ही दोनों प्रधानमंत्री संयुक्त रूप से कुछ नई परियोजनाओं की आधारशिला भी रख सकते हैं, जिनमें दोधारा चांदनी में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट, लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना और सिलीगुड़ी को झापा से जोड़ने वाली पेट्रोलियम पाइपलाइन प्रमुख है।

बड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

बातचीत के दौरान 750 मेगावाट की वेस्ट सेती, 480 मेगावाट की फुकोट करनाली और 450 मेगावाट की सेती रिवर-6 जैसी बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं पर चर्चा होगी, जिनमें भारत की एनएचपीसी कंपनी शामिल है। इसके अलावा सीमा विवाद, हवाई मार्ग, व्यापार, कोसी परियोजना, अयोध्या-जनकपुर रेल लिंक और नेपाल में AI क्षेत्र में भारतीय सहयोग जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से बात होने की संभावना है।

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