नई दिल्ली: भारत की धरोहरों को एक बार फिर दुनिया के नक्शे पर पहचान मिली है। यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में भारत की 5 नई जगहें जोड़ी गई हैं, जिनमें से 4 मध्य प्रदेश की हैं। इन नामों के जुड़ने के बाद भारत की टेंटेटिव लिस्ट में कुल जगहों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है। पहला है मध्य प्रदेश की उदयगिरि गुफा, इसका इतिहास गुप्त काल से जुड़ा है। यहां चट्टानों को काटकर 20 गुफाएं बनाई गई हैं, जिनमें पुरानी मूर्तियां और शिलालेख आज भी देखे जा सकते हैं। माना जाता है कि इनका विकास चौथी और पांचवीं सदी के आसपास हुआ था। यहां की बारीक नक्काशी और गुफाओं की बनावट इन्हें खास बनाती है।
दूसरा है बाघनी नदी के पास विंध्य की पहाड़ियों में बनी बाघ गुफा। यह चट्टानें काटकर 9 बौद्ध गुफाएं तैयार की गई थीं। इनकी सबसे बड़ी पहचान दीवारों पर बनी पुरानी पेंटिंग्स हैं, जिनमें उस दौर की जिंदगी की झलक मिलती है। लोगों का पहनावा, नाच-गाना और जुलूस जैसे दृश्य इन चित्रों में साफ दिखाई देते हैं।
गिन्नौरगढ़ किला और बाघ गुफाओं की पेंटिंग्स
पहाड़ी इलाके में बना गिन्नौरगढ़ किला कभी राजगोंड शासकों का अहम ठिकाना हुआ करता था। यह किला अपने पुराने इतिहास के लिए जाना जाता है और इसके आसपास का इलाका भी देखने लायक है। अब यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में नाम आने से इसे नई पहचान मिली है।
चंबल घाटी के मंदिरों में तीन पुराने मंदिर समूह शामिल हैं: बटेश्वर, पदावली और ककरमठ। इनकी दीवारों और पत्थरों पर बहुत महीन नक्काशी दिखती है, जो उस समय की कला और मंदिर बनाने की शैली को बयां करती है। तीनों जगहों को एक साथ इस लिस्ट में जगह मिली है।
गांधी के सत्याग्रह से जुड़ी जगहें
पांचवीं एंट्री महात्मा गांधी के सत्याग्रह से जुड़ी जगहों का प्रस्ताव है। इसमें कुल 9 स्थान हैं, जिनमें 7 भारत में और 2 दक्षिण अफ्रीका में हैं। गांधी जी ने जीवन के 21 साल दक्षिण अफ्रीका में बिताए थे, जहां सत्याग्रह की शुरुआत हुई। भारत लौटकर उन्होंने इसे आगे बढ़ाया। इस प्रस्ताव में साबरमती आश्रम, मणि भवन, गांधी स्मृति और सेवाग्राम जैसी जगहें शामिल हैं।
टेंटेटिव लिस्ट का मतलब
यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट एक शुरुआती सूची होती है, जिसमें किसी देश की खास जगहों के नाम रखे जाते हैं। आगे चलकर इनमें से कुछ को वर्ल्ड हेरिटेज साइट के लिए भेजा जा सकता है। यानी इस लिस्ट में नाम आने का मतलब यह नहीं कि जगह को अभी वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा मिल गया है, बल्कि यह उस ओर बढ़ाया गया एक जरूरी कदम है।












