नई दिल्ली: मुस्लिम महिलाओं को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद इस्लामिक स्कॉलर और ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर मुसुलियार एक बार फिर से चर्चा में हैं। बता दें, अब उनका एक नया बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि विरोध के बावजूद वह शरिया के प्रचार और उसके बारे में लोगों को जागरूक करने का काम जारी रखेंगे। शनिवार रात कोझिकोड में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय मिलाद सम्मेलन’ में पहुंचे शेख अबूबकर ने शरिया को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब वह शरिया की बात करते हैं तो उनका मतलब अल्लाह के बताए कानून और पैगंबर मोहम्मद द्वारा बताए गए रास्ते से है।
ग्रैंड मुफ्ती ने कहा कि पैगंबर ने शरिया का पालन करने वाले लोगों के एक समूह के कयामत तक कायम रहने की बात कही थी। उनके मुताबिक, दुनिया में चाहे शरिया का कितना भी विरोध क्यों न किया जाए, अल्लाह का कानून और पैगंबर का बताया रास्ता लोगों के बीच अपनी जगह बनाए रखेगा।
हर जिले में शरिया सम्मेलन की इच्छा
अपने संबोधन के दौरान शेख अबूबकर ने केरल के सभी जिलों में शरिया सम्मेलन आयोजित करने की इच्छा भी जाहिर की। उन्होंने लोगों से इस पहल के लिए एकजुट होकर सहयोग करने की अपील की हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले महिलाओं को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर काफी विवाद हुआ था। उनके उस बयान की राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर आलोचना की गई थी।
महिलाओं पर बयान से हुआ था विवाद
ग्रैंड मुफ्ती ने पहले कहा था कि महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाना समाज के लिए ‘बड़ी बर्बादी’ का कारण बन सकता है। उनके इस बयान के बाद केरल में राजनीतिक नेताओं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने आपत्ति जताई थी। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन समेत कई नेताओं ने उनके विचारों की आलोचना की। सतीशन ने इस सोच को पुरानी मानसिकता बताते हुए कहा था कि समाज को महिलाओं की बराबर भागीदारी की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
विवाद के बाद दी थी सफाई
बयान पर विवाद बढ़ने के बाद शेख अबूबकर ने अपनी बात स्पष्ट करने की कोशिश भी की थी। उन्होंने कहा था कि वह महिलाओं को घर की चारदीवारी में सीमित रखने या उनके अधिकारों को दबाने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि वह खुद महिलाओं की शिक्षा और उनके आगे बढ़ने का समर्थन करते हैं और कई महिलाओं को पढ़ाई व विकास के अवसर उपलब्ध कराने में मदद करते रहे हैं। अब शरिया को लेकर दिए गए उनके ताजा बयान के बाद एक बार फिर इस मुद्दे पर बहस तेज होने की संभावना है।












