नई दिल्ली: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रत्येक माह के दोनों पक्षों में पड़ने वाले एकादशी व्रत भगवान श्री हरि विष्णु की साधना और कृपा प्राप्ति का सबसे उत्तम माध्यम होते हैं। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस पावन तिथि पर निष्ठापूर्वक व्रत रखने और भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की आराधना करने से साधक के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है। भाद्रपद का पूरा महीना ही नारायण की भक्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
शुभ तिथि और मुहूर्त
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 6 सितंबर 2026 को शाम 7 बजकर 29 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन 7 सितंबर 2026 को शाम 5 बजकर 03 मिनट पर होगा।
उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा। श्रद्धालुओं को इसी दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
पूजा की संपूर्ण और सटीक विधि
अजा एकादशी के दिन प्रातकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर स्नान करना चाहिए। इस दिन पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके पश्चात हाथ में जल लेकर श्री हरि का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर या पूजा स्थल की अच्छे से सफाई कर गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
नारायण को पीला चंदन, रोली, अक्षत, पीले पुष्प और मौली अर्पित करें। तत्पश्चात शुद्ध देसी घी का दीपक और धूप जलाएं। भगवान को फल, मिष्ठान और पंजीरी का भोग लगाएं। ध्यान रहे कि भोग में तुलसी का पत्ता अवश्य शामिल करें, क्योंकि इसके बिना विष्णु जी भोग स्वीकार नहीं करते। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करते रहें। अंत में अजा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें अथवा सुनें और आरती के साथ पूजा संपन्न करें।
पारण का समय और नियम
एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब इसका पारण नियमानुसार शुभ समय पर किया जाए। अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर 2026 को किया जाएगा। इस दिन पारण के लिए शुभ समय सुबह 6 बजकर 25 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। 8 सितंबर को द्वादशी तिथि दोपहर 2 बजकर 42 मिनट पर समाप्त हो रही है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के समाप्त होने से पहले ही कर लेना चाहिए।











