नई दिल्ली: गाजियाबाद से जुड़े जासूसी मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। एनआईए ने यह आरोपपत्र लखनऊ स्थित विशेष एनआईए अदालत में भारतीय न्याय संहिता, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दाखिल किया है।
एनआईए के मुताबिक आरोपपत्र में प्रवीण, राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि, रितिक गंगवार, समीर उर्फ शूटर, दुर्गेश निषाद, नौशाद, गगन कुमार, विवेक, शिवराज, मीरा ठाकुर और शेन इरम उर्फ महक को आरोपी बनाया गया है। हालांकि प्रेस विज्ञप्ति में 13 आरोपियों का उल्लेख किया गया है, नामों की सूची में 12 नाम ही दिए गए हैं।
मामले की शुरुआत और अब तक की गिरफ्तारियां
मामले की शुरुआत 14 मार्च 2026 को कौशांबी थाने में दर्ज प्राथमिकी से हुई थी। शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच आगे बढ़ने पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 18 भी जोड़ी गई। एनआईए के अनुसार अब तक मामले में 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने कथित तौर पर आपराधिक साजिश के तहत देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के लिए गंभीर खतरा पैदा करने वाले काम किए। एनआईए के अनुसार आरोपियों ने महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध रूप से प्रवेश किया तथा वहां गुप्त कैमरे लगाए।
दुश्मन देश को पहुंचाई गई संवेदनशील जानकारी
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि संवेदनशील प्रतिष्ठानों के फोटो और वीडियो, भौगोलिक स्थिति संबंधी जानकारी तथा सटीक जीपीएस निर्देशांक कथित तौर पर दुश्मन देश से जुड़े तत्वों तक पहुंचाए गए। एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने अवैध गतिविधियों के लिए भारतीय सिम कार्ड उपलब्ध कराने और उनके इस्तेमाल में भी मदद की। एनआईए ने बताया कि मामले में पांच विधि-विरुद्ध बालकों के संबंध में विस्तृत जांच रिपोर्ट पहले ही 18 मई 2026 को गाजियाबाद के किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष दाखिल की जा चुकी है। एजेंसी के अनुसार मामले में अन्य आरोपियों और संदिग्धों की भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है।












