नई दिल्ली: वर्दी सिर्फ कानून की पहचान नहीं, बल्कि सम्मान अनुशासन और जिम्मेदारी का प्रतीक भी है। लेकिन जब इसी वर्दी को अपनी गरिमा और सम्मान के लिए आवाज उठानी पड़े तो मामला महकमे के भीतर तक हलचल पैदा कर देता है। शाहदरा थाने में वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच हुए विवाद के बाद एसीपी और एसएचओ के तबादले से उपजी नाराजगी अब पुलिस मुख्यालय तक पहुंच चुकी है। एसीपी मानसवी वशिष्ठ के नेतृत्व में पुलिसकर्मियों के मुख्यालय पहुंचकर विरोध जताने के घटनाक्रम के बीच सोमवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय में पुलिस आयुक्त ने संपर्क सभा आयोजित कर जवानों की बात सुनी। इस बैठक को पुलिस महकमे के भीतर भरोसा बहाल करने और शिकायतों के समाधान की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
खाकी की नाराजगी पर कमिश्नर का संवाद वाला जवाब
दरअसल शाहदरा थाने में वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच हुए विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव का माहौल बना। आरोप है कि थाने के भीतर कुछ वकीलों ने तत्कालीन थाना प्रभारी और सहायक पुलिस आयुक्त के साथ दुर्व्यवहार किया था। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला और गरमा गया। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने शाहदरा के एसीपी और एसएचओ का तबादला कर दिया। इस प्रशासनिक फैसले से नाराज पुलिसकर्मियों ने अपनी आवाज बुलंद की और मुख्यालय तक पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। इसी घटनाक्रम के बीच 2 नवंबर को पुलिस मुख्यालय में आयोजित संपर्क सभा में पुलिस आयुक्त सभी विशेष पुलिस आयुक्तों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न रैंक के पुलिसकर्मियों से सीधा संवाद किया। इस दौरान जवानों ने खुलकर अपनी परेशानियां रखीं।पुलिसकर्मियों ने पुलिस बल के सम्मान, वर्दी की गरिमा और ड्यूटी के दौरान आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने की मांग उठाई।
वकील-पुलिस टकराव पर बनेगी संयुक्त समन्वय समिति
संपर्क सभा के दौरान सबसे अहम निर्णय पुलिस और वकीलों के बीच ड्यूटी के दौरान होने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए लिया गया। दिल्ली पुलिस बार एसोसिएशन और बार काउंसिल के प्रतिनिधियों को शामिल कर जिला और पुलिस मुख्यालय स्तर पर संयुक्त समन्वय समिति गठित की जाएगी। यह समिति सरकारी ड्यूटी के दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को वकीलों के साथ आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को समझेगी और आपसी बातचीत के जरिए उनका समाधान निकालने का प्रयास करेगी। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानून के दो महत्वपूर्ण अंगों के बीच किसी विवाद की स्थिति पैदा होने पर मामला टकराव तक न पहुंचे। दोनों पक्षों के बीच बेहतर तालमेल और संवाद स्थापित कर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की कोशिश की जाएगी।
प्रमोशन से मकान तक, जवानों की हर समस्या पर नजर
संपर्क सभा में केवल वकील-पुलिस विवाद ही नहीं बल्कि पुलिसकर्मियों की रोजमर्रा की सेवा संबंधी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। पदोन्नति, सुनिश्चित कैरियर प्रगति योजना (एमएसीपी) आवास और नौकरी से जुड़े अन्य मामलों पर उचित ध्यान देने का भरोसा दिया गया। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जवानों की वास्तविक और जायज शिकायतों पर शीघ्र तथा उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी जिला और इकाई प्रमुखों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने स्तर पर नियमित रूप से संपर्क सभाएं आयोजित करें। हर रैंक के पुलिसकर्मियों से सीधे बातचीत की जाए उनकी समस्याएं सुनी जाएं और समयबद्ध तरीके से समाधान की कार्रवाई शुरू की जाए। इतना ही नहीं वरिष्ठ अधिकारी शिकायतों के निस्तारण की व्यक्तिगत रूप से निगरानी भी करेंगे ताकि कोई वास्तविक समस्या अनसुनी न रह जाए।
बीआरआईसीएस सम्मेलन में खाकी के योगदान की सराहना
पुलिस आयुक्त ने पुलिस बल के पेशेवर रवैये, प्रतिबद्धता और अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था संभालने और बीआरआईसीएस सम्मेलन का सफल आयोजन कराने में पुलिसकर्मियों ने सराहनीय भूमिका निभाई है। उन्होंने जवानों के समर्पण और मेहनत की प्रशंसा की तथा भरोसा दिलाया कि उनकी जायज समस्याओं को व्यवस्थित तरीके से सुलझाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंग
Reported By: Pankaj Rai












