EV खरीदने से पहले समझ लें ‘EBCD’, वरना सफर पड़ सकता है भारी

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Electric Vehicle
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नई दिल्ली: EV यानी इलेक्ट्रिक कार चलाने का तरीका पेट्रोल और डीजल कारों से काफी अलग होता है. इसे खरीदने से लेकर चलाने, ब्रेक लगाने और चार्ज करने तक कई चीजों का ध्यान रखना पड़ता है. इसकी रेंज बढ़ाने के लिए भी कुछ खास बातों को समझना जरूरी है. अगर आपको इन चीजों की जानकारी नहीं है, तो इलेक्ट्रिक कार खरीदने के बाद परेशानी हो सकती है और आपको लग सकता है कि आपने गलत गाड़ी खरीद ली. इसलिए हम आपको इलेक्ट्रिक कार की ‘EBCD’ यानी जरूरी बेसिक बातें आसान भाषा में बता रहे हैं, ताकि आपका EV का सफर आरामदायक और बिना परेशानी के रहे.

बैटरी टाइप जरूर चेक करें

EV में बैटरी सबसे जरूरी हिस्सा होती है. आपकी कार की रेंज और परफॉर्मेंस काफी हद तक इसी पर निर्भर करती है. बैटरी में खराबी आने पर खर्च भी काफी ज्यादा हो सकता है. इसलिए कार खरीदने से पहले यह जरूर पता कर लें कि उसमें NMC या LFP में से कौन सी बैटरी लगी है. दोनों ही लिथियम-आयन बैटरी हैं, लेकिन उनकी तकनीक अलग है. NMC बैटरी में निकेल, मैंगनीज और कोबाल्ट का इस्तेमाल होता है, जबकि LFP बैटरी में लिथियम, आयरन और फॉस्फेट का इस्तेमाल किया जाता है.
अगर आपकी EV में LFP बैटरी है, तो इसे रोजाना 100% तक चार्ज किया जा सकता है. अगर रोज फुल चार्ज करना संभव नहीं है, तो हफ्ते में करीब दो बार 100% चार्ज करना अच्छा माना जाता है. इससे बैटरी के BMS (Battery Management System) को बैटरी की क्षमता समझने और सही तरीके से काम करने में मदद मिलती है. वहीं, NMC बैटरी के लिए रोजाना 20% से 80% के बीच चार्ज रखने की सलाह दी जाती है. कोशिश करें कि बैटरी 20% से नीचे न जाए और रोजाना 80% से ज्यादा चार्ज न करें. इससे बैटरी की लाइफ बेहतर बनी रह सकती है. हालांकि, अगर लंबी यात्रा पर जा रहे हैं तो जरूरत के हिसाब से इसे 100% तक चार्ज करना बिल्कुल ठीक है.

चार्जिंग का तरीका समझिए

EV की चार्जिंग को आप घर के खाने और बाहर के खाने जैसा समझ सकते हैं. रोजमर्रा के लिए AC चार्जिंग को प्राथमिकता दें, इसमें कार के साथ मिलने वाला चार्जर इस्तेमाल किया जाता है. यह AC करंट को DC में बदलता है, क्योंकि कार की बैटरी DC करंट को ही स्टोर करती है. AC चार्जिंग में समय थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन यह बैटरी पर अपेक्षाकृत कम दबाव डालती है, यानी रोजाना की चार्जिंग के लिए यह बेहतर विकल्प है. आसान भाषा में कहें तो Slow and steady wins the race

वहीं, DC फास्ट चार्जिंग को बाहर के खाने जैसा समझिए. इससे बैटरी बहुत तेजी से चार्ज हो जाती है, लेकिन इसे रोजाना इस्तेमाल करना सही नहीं माना जाता. जरूरत पड़ने पर, खासकर लंबी यात्रा के दौरान, DC फास्ट चार्जिंग का इस्तेमाल करें. यानी रोज के लिए AC चार्जिंग और जरूरत के समय DC फास्ट चार्जिंग—यही EV चार्जिंग का आसान फॉर्मूला है.

रेंज का रंज-ओ-गम

EV की रेंज का पूरा फायदा उठाना है तो शहर में कार को ECO मोड पर चलाएं. कई गाड़ियों में इसे City Mode भी कहा जाता है, इस मोड में कार की पावर अच्छी तरह मैनेज होती है और बैटरी भी कम खर्च होती है, जिससे बार-बार चार्ज करने की जरूरत कम पड़ती है. Sport Mode का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर ही करें, खासकर हाईवे पर, इसमें कार ज्यादा पावर देती है, लेकिन बैटरी भी तेजी से खर्च होती है और रेंज कम हो जाती है. इसलिए लंबी यात्रा पर निकलने से पहले रास्ते में मौजूद चार्जिंग स्टेशन जरूर चेक कर लें.

इसके अलावा तेज रफ्तार, बहुत ज्यादा AC चलाना, पहाड़ी रास्ते और बार-बार तेज एक्सीलेरेशन से भी EV की रेंज कम हो सकती है. इसलिए कंपनी जितनी रेंज का दावा करती है, सफर की प्लानिंग करते समय उसमें से करीब 30% कम रेंज मानकर चलें. ऐसा करने से रास्ते में बैटरी खत्म होने की चिंता कम होगी और आपका EV सफर Suffer में नहीं बदलेगा.

Regen Braking का सिस्टम समझें

EV में RBS यानी Regenerative Braking System बैटरी और रेंज के लिए काफी काम की तकनीक है. जब आप कार में ब्रेक लगाते हैं, तो उस दौरान पैदा होने वाली कुछ ऊर्जा को बर्बाद होने के बजाय बैटरी को चार्ज करने में इस्तेमाल किया जाता है. इससे कार की रेंज बढ़ाने में मदद मिल सकती है. लेकिन Regen Braking का लेवल सही रखना भी जरूरी है. गलत सेटिंग से ड्राइविंग का अनुभव खराब हो सकता है और रेंज पर भी असर पड़ सकता है.

हाईवे पर अगर सड़क अच्छी और ट्रैफिक कम है, तो Regen Level 1 रखें.

शहर में सामान्य ट्रैफिक के लिए Level 2 बेहतर विकल्प हो सकता है.

भारी ट्रैफिक या पहाड़ी रास्ते से उतरते समय Level 3 इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि बार-बार ब्रेक लगाने की जरूरत पड़ती है.

बारिश में Regen Braking का ज्यादा लेवल कार को अचानक धीमा कर सकता है. इसलिए जरूरत के हिसाब से इसे कम रखें या कार की मैनुअल में दिए निर्देशों का पालन करें.

सही तरीके से Regen Braking का इस्तेमाल करने से ड्राइविंग आसान हो सकती है और बैटरी की रेंज का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है.

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