नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया भर में तेजी से निवेश हो रहा है. बड़ी टेक कंपनियां नए AI मॉडल और विशाल डेटा सेंटर तैयार कर रही हैं. इसका असर अब सिर्फ टेक इंडस्ट्री तक सीमित रहने के बजाय आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है. Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने AI की बढ़ती मांग और मेमोरी की कीमतों को लेकर चिंता जताई है.
AI की बढ़ती मांग से मेमोरी पर दबाव
AI सिस्टम को ट्रेन करने और चलाने के लिए बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग पावर और मेमोरी की जरूरत होती है. इसी वजह से टेक कंपनियां बड़े पैमाने पर चिप्स, GPU, सर्वर और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी खरीद रही हैं.
श्रीधर वेम्बू के मुताबिक, मेमोरी की बढ़ती कीमतें सॉफ्टवेयर और AI से जुड़े कारोबारों के लिए चुनौती बन रही हैं. उनका कहना है कि पहले मेमोरी को आसानी से उपलब्ध संसाधन माना जाता था, लेकिन AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ स्थिति बदल रही है.
फोन और लैपटॉप हो सकते हैं महंगे
मेमोरी चिप्स की कीमत बढ़ने का असर स्मार्टफोन, लैपटॉप और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज पर भी पड़ सकता है. इन डिवाइसेज में RAM और स्टोरेज जैसे कंपोनेंट जरूरी होते हैं. अगर इनकी लागत बढ़ती है तो कंपनियों के लिए पुराने दाम पर डिवाइस बेचना मुश्किल हो सकता है. शुरुआत में कंपनियां बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा खुद उठा सकती हैं, लेकिन कीमतों में लंबे समय तक बढ़ोतरी रहने पर इसका बोझ ग्राहकों तक पहुंचने की संभावना रहती है.
AI डेटा सेंटर बढ़ा रहे हैं चिप्स की मांग
OpenAI, Google, Microsoft, Meta समेत कई बड़ी कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही हैं. इसके लिए बड़ी मात्रा में मेमोरी और कंप्यूटिंग हार्डवेयर की जरूरत है. AI डेटा सेंटर के लिए इस्तेमाल होने वाली हाई-बैंडविड्थ मेमोरी में चिप निर्माताओं की दिलचस्पी बढ़ी है. इससे सामान्य मेमोरी की सप्लाई पर भी दबाव पड़ सकता है.
AI का असर सिर्फ नौकरियों तक सीमित नहीं
श्रीधर वेम्बू पहले भी AI के कारण IT सेक्टर में रोजगार को लेकर चिंता जता चुके हैं. अब मेमोरी और कंप्यूटिंग लागत को लेकर उनकी टिप्पणी ने AI के एक और संभावित असर की ओर ध्यान खींचा है. अगर AI की बढ़ती मांग के कारण हार्डवेयर की लागत लगातार बढ़ती है, तो आने वाले समय में फोन, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स की कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है.











