नई दिल्ली: त्योहारों की दस्तक के साथ ही भारतीय रसोई में मिठास घोलने वाली चीनी इस बार आम परिवारों के बजट पर भारी पड़ रही है। गणेश चतुर्थी, दिवाली और आने वाले पर्वों की तैयारियों के बीच जहां मिठाइयों और पारंपरिक पकवानों के लिए चीनी की मांग तेजी से बढ़ी है, वहीं उपभोक्ताओं को दोहरा झटका झेलना पड़ रहा है। बाजार में एक तरफ चीनी के दाम तेजी से उछले हैं, तो दूसरी तरफ आप जेब खाली करने को तैयार भी हों तो मनमुताबिक मात्रा में खरीदारी नहीं कर सकते।
कीमतों में क्यों आया उछाल
बाजार में पैदा हुई इस तंगी और चढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप किया है।
सरकार ने 20 अगस्त के अपने मूल नोटिफिकेशन के नियमों में ढील देते हुए ड्यूटी-फ्री (शुल्क मुक्त) चीनी आयात के नियमों को और व्यावहारिक बनाया है।
ऑनलाइन से लेकर किराना स्टोर तक लगी पाबंदी
डिजिटल दौर की तेजतर्रार डिलीवरी देने वाले क्विक-कॉमर्स ऐप्स से लेकर शहर के बड़े रिटेल सुपरमार्केट्स तक चीनी की बिक्री पर सख्त सीमाएं तय कर दी गई हैं। जेप्टो, ब्लिंकिट और स्विगी इंस्टामार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कई ब्रांड्स के पैकेट्स की सीमित उपलब्धता दिखाई दे रही है। स्विगी इंस्टामार्ट पर तो ‘सुप्रीम हार्वेस्ट क्रिस्टल शुगर’ जैसे चुनिंदा उत्पादों की बिक्री को प्रति ऑर्डर अधिकतम दो पैकेट (1-1 किलो) तक सीमित कर दिया गया है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की यह सख्ती अब सीधे जमीनी बाजारों में भी दिखने लगी है। डी-मार्ट और रिलायंस रिटेल जैसे बड़े ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स ने भी कई शहरों में प्रति ग्राहक 2 से 3 किलोग्राम चीनी की खरीदारी की सीमा लगा दी है। ऐसे में सामान्य घरेलू जरूरतों के लिए एकाध किलो चीनी खरीदने वालों पर तो बड़ा असर नहीं पड़ा है, लेकिन त्योहारों पर थोक में मिठाई बनाने वाले या स्टॉक जमा करने की सोच रहे परिवारों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
क्या है सरकार का कदम?
दरअसल, सरकार ने टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) के तहत 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन (1 मिलियन टन) कच्चे चीनी के बिना शुल्क आयात की मंजूरी दी थी। शुरुआती नियम के मुताबिक आयातकों को 31 अक्टूबर तक ही इस कच्चे माल को रिफाइंड चीनी में बदलकर घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य था। लेकिन जमीनी व्यवस्था और आपूर्ति की चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने नियमों में बदलाव कर दिया है। अब आयातकों को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से पूरे 2 महीने का समय मिलेगा, ताकि वे कच्चे चीनी को रिफाइन करके आराम से स्थानीय बाजार में उतार सकें।
क्या समय पर मिलेगी राहत?
सरकार का यह कदम जमाखोरी रोकने, सट्टेबाजी पर लगाम लगाने और बाजार में चीनी का प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला से चीनी को भारतीय रिटेल काउंटरों तक पहुंचने में थोड़ा वक्त लगना तय है। जब तक आयातित चीनी का स्टॉक थोक और खुदरा बाजार में पूरी तरह नहीं उतरता, तब तक रिटेलर्स अपने मौजूदा स्टॉक को बचाकर बेचने के लिए यह कोटा व्यवस्था लागू रख रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि सरकार के इन नीतिगत फैसलों का असर आम जनता की थाली तक कितनी जल्दी पहुंचता है। आने वाले हफ्ते यह तय करेंगे कि सरकारी कदम समय रहते मिठास का संकट दूर कर पाते हैं या त्यौहारों का मज़ा कुछ फीका ही रहेगा।












