मेघालय कोर्ट में सोनम रघुवंशी का सरेंडर, राजा रघुवंशी हत्याकांड में नया ट्विस्ट

0
7
Raja Raghuvanshi Murder Case
Pinterest

शिलांग: देशभर में चर्चित रहे मेघालय के बहुचर्चित ‘हनीमून मर्डर केस’ की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने आखिरकार अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने और तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने के सख्त निर्देश के अनुपालन में, इंदौर निवासी सोनम ने शिलोंग की ट्रायल कोर्ट के समक्ष खुद को पेश किया. ईस्ट खासी हिल्स जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए आरोपी महिला को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने मेघालय सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सोनम की जमानत खारिज करने का आदेश दिया था. शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मुकदमे के इस अहम चरण में आरोपी की रिहाई जारी रहने से न्यायिक जांच और साक्ष्यों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.

छह महीनों के भीतर ट्रायल की कार्यवाही

अदालत ने यह भी माना कि गिरफ्तारी के वक्त आरोपी को कारणों की पूरी जानकारी थी, लिहाजा गिरफ्तारी मेमो में किसी तकनीकी या टाइपिंग की गलती के आधार पर जमानत की अनुमति देना अनुचित था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह रियायत भी दी कि यदि अगले छह महीनों के भीतर ट्रायल की कार्यवाही पूरी नहीं होती है, तो आरोपी कानून के तहत नई जमानत याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र होगी.

क्या है पूरा मामला

मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली सोनम का विवाह मई 2025 में युवा कारोबारी राजा रघुवंशी के साथ हुआ था. शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों अपनी छुट्टियों के सिलसिले में मेघालय पहुंचे। 23 मई 2025 को सोहरा (चेरापूंजी) क्षेत्र में घूमने के दौरान दोनों अचानक लापता हो गए. लगातार तलाशी अभियान के बाद 2 जून 2025 को वेई सावडोंग झरने के पास एक गहरी खाई से राजा रघुवंशी का शव बरामद किया गया. जांच एजेंसियों के अनुसार, यह कोई दुर्घटना नहीं बल्कि पूर्व-नियोजित षड्यंत्र था. आरोप है कि सोनम ने अपने कथित सहयोगी राज कुशवाहा के साथ मिलकर वित्तीय लाभ हासिल करने के उद्देश्य से सुपारी देकर हत्यारों को हायर किया था.

अदालती कार्यवाही का इतिहास

जून 2025 में गिरफ्तारी के बाद, ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल में सोनम को सशर्त जमानत दे दी थी, जिसे 29 जून को मेघालय उच्च न्यायालय ने भी कायम रखा. इसके बाद मेघालय सरकार ने जमानत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. शीर्ष अदालत के इस हाल ही में लिए गए फैसले के बाद अब मामला एक बार फिर ट्रायल कोर्ट में तेज गति से चलने की उम्मीद है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here