प्रयागराज: स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली मुस्लिम छात्रा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है. अदालत ने उसकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि सिर पर स्कार्फ पहनने को इस्लाम की ऐसी अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं माना जा सकता, जिसे संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत सुरक्षा मिले. अदालत ने स्कूल के तय ड्रेस कोड को लागू रखने के पक्ष में फैसला दिया.
प्रयागराज के एक स्कूल में कक्षा 11 में पढ़ने वाली छात्रा ने अदालत का रुख किया था. उसका कहना था कि वह लंबे समय से हिजाब पहनती आ रही है और इसे उसकी धार्मिक प्रथा का हिस्सा माना जाना चाहिए. हालांकि, न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया.
अनुच्छेद 25 के दावे पर अदालत की टिप्पणी
अदालत ने कहा कि केवल किसी धार्मिक प्रथा को आस्था से जुड़ा बताने भर से उसे संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षण नहीं मिल जाता. इसके लिए यह साबित करना जरूरी है कि संबंधित प्रथा धर्म के लिए आवश्यक और अनिवार्य है. पीठ के मुताबिक, छात्रा की ओर से ऐसा कोई पर्याप्त धार्मिक या कानूनी आधार पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि इस्लाम में सिर ढकना अनिवार्य है और इसके बिना उसकी धार्मिक आस्था प्रभावित होगी.
अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि छात्रा ने मुख्य रूप से इस बात का उल्लेख किया था कि वह बचपन से और कक्षा 6 में स्कूल में दाखिला लेने के बाद से हिजाब पहनती रही है. लेकिन लंबे समय से किसी प्रथा का पालन करना अपने आप में उसे संवैधानिक रूप से अनिवार्य धार्मिक प्रथा साबित नहीं करता.
स्कूल के ड्रेस कोड को माना महत्वपूर्ण
हाईकोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में समान ड्रेस कोड की जरूरत पर भी जोर दिया. अदालत ने कहा कि अगर किसी स्कूल की यूनिफॉर्म नीति सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होती है और उसका उद्देश्य अनुशासन तथा संस्थान की पहचान बनाए रखना है, तो छात्र अपनी व्यक्तिगत पसंद के आधार पर उसमें बदलाव की मांग नहीं कर सकते. छात्रा की ओर से यह भी कहा गया था कि उसने कक्षा 6 से 10 तक हिजाब के साथ पढ़ाई की और उस दौरान स्कूल ने कोई आपत्ति नहीं जताई. अदालत ने इस दलील को भी पर्याप्त नहीं माना. पीठ ने कहा कि पहले किसी तरह की अनुमति या आपत्ति नहीं होने से छात्रा को हिजाब पहनने का स्थायी कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता.
कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले का भी जिक्र
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में पहले दिए गए न्यायिक फैसलों का भी उल्लेख किया. पीठ ने कहा कि कुछ उच्च न्यायालयों ने हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं माना है और उसे कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले से अलग रुख अपनाने का कोई आधार नहीं मिला.
अदालत ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट का स्कूलों में हिजाब से जुड़ा फैसला फिलहाल प्रभावी है. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर विभाजित फैसला आने के बाद अभी अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है. इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने छात्रा की याचिका खारिज कर दी और स्कूल को अपनी निर्धारित यूनिफॉर्म नीति लागू करने की अनुमति दी.












