सऊदी अरब ने UAE को सौंपा फ्लाईदुबई का ओमानी को-पायलट, जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

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नई दिल्ली: फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 के कॉकपिट में हुए खूनी हमले के मामले में अब एक बड़ा अपडेट सामने आया है। सऊदी अरब ने इस विमान के ओमानी को-पायलट को संयुक्त अरब अमीरात के हवाले कर दिया है, जिस पर आरोप है कि उसने उड़ान के दौरान कैप्टन पर हमला कर विमान को क्रैश कराने की कोशिश की थी।

यह विमान यात्रियों को लेकर दुबई से तेल अवीव की ओर जा रहा था, लेकिन बुधवार को कॉकपिट में अचानक दोनों पायलटों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस झगड़े में विमान के कैप्टन स्मित मच्छार बुरी तरह घायल हो गए। आरोप है कि ओमान के रहने वाले को-पायलट ने ही कैप्टन पर हमला किया। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या को-पायलट ने जानबूझकर विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने या उसे क्रैश करने की कोशिश की थी।

सऊदी के तबूक में हुई इमरजेंसी लैंडिंग

इस झगड़े के बाद विमान को तुरंत सऊदी अरब के शहर तबूक की तरफ मोड़ दिया गया, जहां वह सुरक्षित उतर गया। लैंडिंग के बाद सऊदी अधिकारियों ने ओमानी को-पायलट को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की, और बाद में उसे यूएई के अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया गया।

जांच में हुआ हमले की पुष्टि

सऊदी गृह मंत्रालय के मुताबिक यूएई की सुरक्षा टीमों के साथ मिलकर की गई शुरुआती जांच में यह साफ हो गया है कि उड़ान के दौरान को-पायलट ने ही कैप्टन पर हमला किया था। मंत्रालय ने बताया कि दोनों पायलटों को चोटें आई थीं, जिसके बाद उनका अस्पताल में इलाज हुआ। मेडिकल जांच में स्वस्थ पाए जाने के बाद दोनों गुरुवार सुबह अबू धाबी के लिए रवाना हो गए।

यूएई ने भी शुरू की अपनी जांच

इस पूरे घटनाक्रम की अपनी अलग जांच यूएई ने भी शुरू कर दी है। वहां की न्यायिक एजेंसियां कॉकपिट में हुए झगड़े की पूरी परिस्थितियों की पड़ताल करेंगी, ताकि यह पता चल सके कि आखिर किस वजह से विमान को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। यूएई के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह इस घटना पर बारीकी से नजर बनाए हुए है, और मामले की जांच न्यायिक अधिकारी करेंगे।

भारतीय दूतावास के मुताबिक यूएई में भारत के राजदूत दीपक मित्तल अस्पताल पहुंचकर कैप्टन मच्छार और उनके परिवार से मिले। दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि कैप्टन की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है। दूतावास यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि स्थानीय अधिकारियों के साथ तालमेल बनाकर कैप्टन को लगातार बेहतर इलाज और देखभाल मिलती रहे। फिलहाल जांच एजेंसियां यह समझने में जुटी हैं कि आखिर कॉकपिट के अंदर उस दिन क्या हुआ था।

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