नई दिल्ली: जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्री कृष्ण के जन्म की खुशी में मनाया जाता है। लोगों का मानना है की भगवान कृष्ण की पूजा करने से घर में सुख शांति आती है। कान्हा जी को तुलसी बहुत प्रिय है और तुलसी के बिना कान्हा जी का भोग अधूरा माना जाता है। इसलिए जन्माष्टमी के इस पावन पर्व पर तुलसी से जुड़े कुछ जरूरी उपाये हैं जिससे घर में सुख शांति समृद्धि आती है और भगवान विष्णु, श्री कृष्ण और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है।
श्री कृष्ण जी के भोग में तुलसी पत्र जरूरी अर्पित करें
जन्माष्टमी के त्योहार पर कान्हा जी को माखन मिश्री, पंचामृत या पंजीरी का भोग लगाया जाता है, इसलिए कान्हा जी के भोग में तुलसी का पत्ता जरूर डालें। मान्यता है के कान्हा जी को तुलसी बहुत प्रिय होती है और जब तक भोग में तुलसी न डालो भोग अधूरा माना जाता है
तुलसी के पास घी के दिए जलाए
जन्माष्टमी की शांम को तुलसी के पास देसी घी के दिए जलाएं। उसके बाद फिर मंत्र का जाप करें ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’। नाम जप करते के साथ ही आप 11 या 21 बार तुलसी के चारों तरफ परिक्रमा जरूर लगाएं। इसे घर का वातावरण पाज़िटिव रहता है।
मनोकामना पूरी करने के लिए करें ये उपाय
जन्माष्टमी वाले दिन आप तुलसी के पौधे पर लाल चुन्नी चड़ा सकते हैं और तुलसी के पौधे के तने पर कलावा बांधकर श्री कृष्ण से अपनी मनोकामना कह सकते हैं। सच्चे मन से की गई प्रार्थना से मन को शांति मिलती है और भगवान का आशीर्वाद सदा बना रहता है
तुलसी के पौधे पर मंजरी करें अर्पित
तुलसी के पौधे पर मंजरी लगी है तो उसे श्री कृष्ण के चरणों में रख सकते हैं। तुलसी की मंजरी कृष्ण जी के चरणों में अर्पित करना शुभ माना जाता है और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है और परेशानिया कम होने की कामना भी पूरी होती है।
शादीजुदा जोड़े के लिए उपाये
अगर पति-पत्नी के बीच मन मुटाव, तनाव जैसे परेशानियाँ रहती हैं तो श्री कृष्ण के जन्मदिन पर तुलसी के पास बैठ कर श्री कृष्ण और राधा रानी का ध्यान करें। सुहाग की सामग्री अर्पित करें और जीवन में सुख शांति की प्रार्थना करें।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन इन बातों का ध्यान रखें
जन्माष्टमी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़े, पूजा के लिए पहले ही तोड़ कर रख ले।
बिना नहाए तुलसी के पौधे को हाथ नहीं लगाना है।
तुलसी के आस पास गंदगी, झाड़ू, पोंछ, जूते, चप्पल न रखें।
भगवान को तुलसी चढ़ाते व्यक्त साफ और साबूत पत्तों का इस्तमाल करें।












