नई दिल्ली: हिंदू धर्म में सर्वपितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का आखिरी दिन माना जाता है। यह दिन पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए खास होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्राद्ध, तर्पण और दान करने से पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि मालूम नहीं होती या याद नहीं होती, वे भी इस दिन उनका श्राद्ध कर सकते हैं। अगर पितृ पक्ष के दौरान किसी कारणवश श्राद्ध नहीं हो पाया हो, तो सर्वपितृ अमावस्या पर ये काम पूरा कर सकते हैं।
सर्वपितृ अमावस्या कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर 10 अक्टूबर को यह पर्व मनाया जाएगा। श्राद्ध के लिए दोपहर का समय महत्वपूर्ण माना जाता है। सही मुहूर्त जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखना ज्यादा सही रहेगा।
सर्वपितृ अमावस्या पर क्या करना चाहिए?
सर्वपितृ अमावस्या पर ये काम करने चाहिए मान्यता है कि ये करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और जब स्नान करे तो पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर फिर उसे स्नान करें अगर आप किसी नदी में स्नान नहीं कर सकते हैं। स्नान के बाद साफ- सुथरे कपड़े पहनें और इसके बाद पूर्वजों को याद करते हुए पूजा करें। और जब भोजन बनाइए तो श्राद्ध के भोजन में से सबसे पहले देव, गाय, कुत्ते, चीटियों और कौए के लिए भोजन निकाल के अलग रख दे। जरूरतमंदों को भोजन कराएं और अपनी क्षमता के अनुसार अनाज, वस्त्र या धन का दान करें। कई जगह पे शाम को पितरों के याद में दीपक जलाने की परंपरा भी निभाई जाती है जिसमे की शाम के समय घर में दक्षिण दिशा में पितरो के लिए तिल के तेल की दीपक जलाई जाती हैं। मान्यता है की इसे पितरो का आशीर्वाद मिलता है।
सर्वपितृ अमावस्या पर क्या न करे?
सर्वपितृ अमावस्या पर ये काम बिलकुल न करे जैसे की मांस- मछली खाने से बचना चाहिए इस दिन शराब से दूरी रखनी चाहिए। और कई परिवार इस दिन प्याज और लहसुन का सेवन भी करते हैं तो इससे भी बचना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन बनाना चाहिए और ब्राह्मणों को भोग लगाना चाहिए और फिर खुद भी सात्विक ही भोजन खाना चाहिए।
परिवार में झगड़ा और लड़ाई करने से बचना चाहिए, शांतिपूर्वक माहौल बना के रखना चाहिए और पूजा – पाठ करना चाहिए, किसी का अपमान करने और क्रोध करने से भी बचना चाहिए। परिवार के सदस्यों के साथ प्रेम और सम्मान से पेश आएं और मिलझगुल के रहे। अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों की मदद करें और पशु-पक्षियों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था करें किसी का भी दिल न दुखाये । पितृ पक्ष में ये कुछ काम बिलकुल न करे जैसे की विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे शुभ कार्य न करे ये सब काम बाद में करे। और नए सामान की खरीदारी से भी बचे जैसे नये कपड़े या सोना चाँदी, गाड़ी आदि।
श्राद्ध करते समय इन जरूरी नियमों का रखें ध्यान
श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर का समय विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुतुप काल और अपराह्न काल में पितरों का श्राद्ध करना शुभ रहता है। लेकिन सही मुहूर्त के लिए उस दिन का पंचांग एकबार जरूर देख ले। और श्राद्ध अपनी भूमि या किसी पवित्र स्थान पर करना अच्छा माना जाता है,और इस दौरान मन में श्रद्धा रखते हुए पूरे विधि-विधान से पितरों का स्मरण करना चाहिए। इसके अलावा श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को संयमित जीवन बिताने और ब्रह्मचर्य का पालन करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इन नियमों का ध्यान रखने से श्राद्ध कर्म श्रद्धापूर्वक संपन्न होते हैं।
डिस्क्लेमर: लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। पूजा-विधि और नियम अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकते हैं।












