नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच शनिवार को टेलीफोन पर एक महत्वपूर्ण बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में और अधिक प्रगाढ़ बनाने पर गहन विचार-विमर्श किया। द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ कूटनीतिक सौहार्द दर्शाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जेडी वेंस और उनकी पत्नी व ‘सेकंड लेडी’ उषा वेंस को उनके पुत्र के जन्म पर बधाई दी और उनके पूरे परिवार के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। प्रधानमंत्री ने X पर एक पोस्ट के माध्यम से इस संवाद की जानकारी साझा करते हुए दोनों देशों के मजबूत संबंधों को रेखांकित किया।
द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर ध्यान
अमेरिकी सीनेट में पारित रूस प्रतिबंध विधेयक में रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। अगर यह कदम लागू होता है, तो भारत समेत रूस से तेल आयात करने वाले कई देशों पर इसका असर पड़ सकता है।
भारत रूसी कच्चे तेल का आयात करता रहा है। इन चुनौतियों के बावजूद, दोनों देश एक संतुलित रूप से लाभदायक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए निरंतर बातचीत कर रहे हैं।
रणनीतिक साझेदारी का विस्तार
व्यापारिक मुद्दों के अलावा, भारत और अमेरिका के बीच रक्षा उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों, महत्वपूर्ण खनिजों तथा आपूर्ति श्रृंखला जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच बढ़ती व्यापारिक प्राथमिकताओं तथा वैश्विक रणनीतिक स्थिति को देखते हुए, पीएम मोदी और उपराष्ट्रपति वेंस की यह चर्चा दोनों देशों के मध्य संबंधों को बनाए रखने की दिशा में एक अहम मोड़ मानी जा रही है। भारत रूसी कच्चे तेल का आयात करता रहा है। इन चुनौतियों के बावजूद, दोनों देश एक संतुलित रूप से लाभदायक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए निरंतर बातचीत कर रहे हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती पर बातचीत
यह टेलीफोनिक संवाद ऐसे समय में हुआ है जब दोनों राष्ट्रों के बीच कई नीतियां और प्रस्तावित कानून चर्चा के केंद्र में हैं। अमेरिकी कांग्रेसमैन राइली मूर ने आरोप लगाया था कि NGO, ट्रस्ट और धार्मिक संगठनों को मिलने वाले विदेशी चंदे से जुड़े नियमों में बदलाव से सरकारी हस्तक्षेप बढ़ सकता है। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विधायी मामले देश का आंतरिक विषय हैं और भारत में विदेशी फंडिंग को विनियमित करने के लिए पारदर्शी नियम आवश्यक हैं। प्रधानमंत्री ने X पर एक पोस्ट के माध्यम से इस संवाद की जानकारी साझा करते हुए दोनों देशों के मजबूत संबंधों को रेखांकित किया।












