नई दिल्ली: क्या खराब मूड या मन की परेशानी की वजह से कर्मचारी ऑफिस से छुट्टी ले सकते हैं? आमतौर पर कंपनियों की लीव पॉलिसी में ऐसी कोई अलग कैटेगरी देखने को नहीं मिलती. लेकिन चीन की एक रिटेल कंपनी ने वर्कर्स की इमोशनल हेल्थ को ध्यान में रखते हुए ‘अनहैप्पी लीव’ की व्यवस्था शुरू की है. वहीं अब इस पोलिसी का जिक्र कर आरपीजी ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने भारतीय कॉरपोरेट कल्चर पर सवाल खड़ा किया है.
हर्ष गोयनका की पोस्ट में क्या?
हर्ष गोयनका सोशल मीडिया पर अपने कारोबारी विचारों और पोस्ट के लिए अक्सर चर्चा में रहते हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चीन की रिटेल चेन पांग डोंग लाई की इस नीति के बारे में जानकारी शेयर की है. इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि क्या भारतीय कंपनियों को भी कर्मचारियों के लिए ऐसी व्यवस्था पर विचार करना चाहिए.
10 दिन की पेड ‘अनहैप्पी लीव’
गोयनका के मुताबिक, पांग डोंग लाई अपने कर्मचारियों को साल में 10 दिन तक वेतन सहित ‘अनहैप्पी लीव’ लेने की सुविधा देती है. इसका मतलब है कि अगर कोई कर्मचारी मानसिक या भावनात्मक रूप से ठीक महसूस नहीं कर रहा है, तो वह बिना किसी सामान्य बीमारी या दूसरी वजह बताए छुट्टी ले सकता है.
इस नीति के पीछे कंपनी के संस्थापक यू डोंगलाई की सोच बताई जाती है. उनका मानना है कि किसी कर्मचारी को तब काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, जब वह मानसिक तौर पर काम करने की स्थिति में न हो. खास बात यह भी बताई जाती है कि मैनेजमेंट कर्मचारियों की ऐसी छुट्टी की मांग को अस्वीकार नहीं कर सकता.
क्या भारत में लागू हो सकती है ये पॉलिसी
हर्ष गोयनका ने अपनी पोस्ट के जरिए इस मुद्दे पर चर्चा की जरूरत बताई. उनका सवाल सिर्फ नई तरह की छुट्टी शुरू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी है कि भारतीय कंपनियां ऐसा कार्यस्थल कैसे तैयार करें, जहां कर्मचारी तनाव कम महसूस करें और काम पर आने को लेकर सकारात्मक रहें. बता दें, चीन की यह नीति 2024 में चाइना सुपरमार्केट वीक के दौरान चर्चा में आई थी. उस समय यू डोंगलाई ने वर्कर्स के मेंटल और इमोशनल स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की बात कही थी.
हर्ष गोयनका की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर वर्क-लाइफ बैलेंस, एम्प्लॉई वेलफेयर और मेंटल हेल्थ को लेकर बहस शुरू कर दी है. हालांकि भारत में ऐसी नीति कितनी व्यावहारिक होगी, यह अलग सवाल है, लेकिन इस चर्चा ने कंपनियों को पारंपरिक छुट्टी व्यवस्था से आगे सोचने का एक नया मुद्दा जरूर दे दिया है.












