बेंगलुरु: कर्नाटक में राज्य के मंत्री रिजवान अरशद ने दावा किया कि तेल कंपनियों के कुछ नमूनों में इथेनॉल तय 20 फीसदी से ज्यादा मिला। इंडियन ऑयल के एक सैंपल में इसकी मात्रा 31.2 फीसदी दर्ज हुई। उन्होंने केंद्र से कार्रवाई और मुआवजे की मांग की।अरशद के मुताबिक, विभाग ने 63 नमूने लिए। मान्यता प्राप्त लैब की जांच में IOCL के सैंपल में 31.2 फीसदी, HPCL में 30.5 फीसदी, BPCL में 26.5 फीसदी, नायरा में 26.1 फीसदी और शेल में 25.5 फीसदी इथेनॉल मिला। कई जिलों के नमूने E20 सीमा से ऊपर थे।
मंत्री ने कहा कि IOCL और BPCL की अपनी लैब की रिपोर्ट में इथेनॉल की मात्रा नहीं बताई गई। इसके बाद NABL और ISO से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच कराई गई। उन्होंने पारदर्शिता पर सवाल उठाया।
वाहनों को नुकसान और माइलेज घटने की आशंका
अरशद ने सवाल किया कि क्या भारतीय वाहन 20 फीसदी से अधिक इथेनॉल वाले पेट्रोल के लिए बने हैं। उनका दावा है कि देश के 35 करोड़ से ज्यादा वाहनों में करीब 99 फीसदी E20 से अधिक मिश्रण के अनुकूल नहीं हैं। ज्यादा इथेनॉल से रबर के पुर्जे, होज, गैस्केट और सील खराब हो सकते हैं। कम इथेनॉल वाले पेट्रोल का विकल्प भी नहीं है। मंत्री ने माइलेज में 10 फीसदी कमी के आधार पर सालाना 62 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया। मरम्मत का खर्च जोड़कर उन्होंने कुल नुकसान एक लाख करोड़ रुपये तक बताया।
केंद्र से चार मांगें
अरशद ने ज्यादा इथेनॉल मिलाने वाली कंपनियों पर कार्रवाई, प्रभावित वाहन मालिकों के लिए मुआवजा फंड और समयबद्ध दावा प्रक्रिया की मांग की। उन्होंने हर पेट्रोल पंप पर इथेनॉल का प्रतिशत दिखाने और ग्राहकों को इसकी जानकारी देने को जरूरी बताया। साथ ही केंद्र से वास्तविक ब्लेंडिंग स्तर सार्वजनिक करने को कहा। राज्य सरकार अपनी रिपोर्ट केंद्र को सौंपेगी और जांच जारी रखेगी।
केंद्र ने चिंताओं को खारिज किया
केंद्र का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी। सरकार E20 से वाहनों को नुकसान की आशंकाओं को खारिज करती रही है। नितिन गडकरी ने विरोध को ‘पेड कैंपेन’ बताया था, जबकि हरदीप सिंह पुरी ने वाहन संबंधी चिंताओं को गलत जानकारी कहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आयात में बचत को कार्यक्रम की उपलब्धि बता चुके हैं।












