नई दिल्ली: आपने मॉल, ऑफिस या किसी बड़ी बिल्डिंग की लिफ्ट में शीशा जरूर देखा होगा। लिफ्ट में जाते ही कई लोग उसमें अपना चेहरा देखते हैं, बाल ठीक करते हैं या सेल्फी ले लेते हैं. हो सकता है आप भी ऐसा करते हों, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लिफ्ट में शीशा सिर्फ चेहरा देखने के लिए लगाया जाता है या इसके पीछे कोई और वजह भी है? आइए जानते हैं कि लिफ्ट में शीशा लगाने का असली कारण क्या है.
क्लॉस्ट्रोफोबिया से बचाने में मदद करता है शीशा
लिफ्ट छोटी और चारों तरफ से बंद होती है. ऐसे में कुछ लोगों को बंद जगह में डर या घबराहट महसूस होती है, जिसे क्लॉस्ट्रोफोबिया कहा जाता है अगर लिफ्ट में ज्यादा लोग हों, तो यह परेशानी और बढ़ सकती है, इसी वजह से लिफ्ट में शीशा लगाया जाता है. शीशा लिफ्ट को देखने में बड़ा और खुला दिखाता है इससे लोगों को कम घुटन महसूस होती है, उनका मन शांत रहता है और सफर ज्यादा आरामदायक लगता है.
लिफ्ट का सफर आसान महसूस कराने के लिए
ऊंची इमारतों में लिफ्ट से ऊपर या नीचे जाने में थोड़ा समय लग सकता है. इसलिए लिफ्ट में शीशे लगाए जाते हैं, ताकि लोगों का ध्यान सफर के समय से हट जाए, लोग शीशे में खुद को देखते हैं, बाल या कपड़े ठीक कर लेते हैं और समय जल्दी बीतता हुआ महसूस होता है। इससे लिफ्ट का सफर छोटा और ज्यादा आरामदायक लगता है.
सुरक्षा बढ़ाने में भी मदद करता है
लिफ्ट में शीशा लगाने की एक बड़ी वजह सुरक्षा भी है. मॉल, ऑफिस या दूसरी जगहों पर कई बार अनजान लोग एक साथ लिफ्ट में सफर करते हैं, ऐसे में शीशे की मदद से लोग अपने आसपास और पीछे खड़े लोगों पर आसानी से नजर रख सकते हैं इससे चोरी या किसी तरह की बदतमीजी की संभावना कम हो जाती है.
व्हीलचेयर इस्तेमाल करने वालों के लिए भी फायदेमंद
व्हीलचेयर यूजर्स के लिए लिफ्ट में घूमना हमेशा आसान नहीं होता. ऐसे में शीशा उन्हें पीछे की तरफ देखने में मदद करता है, इससे उन्हें बार-बार मुड़ना नहीं पड़ता और लिफ्ट से बाहर निकलते समय दरवाजे से टकराने या फंसने का खतरा भी कम हो जाता है.












