तिब्बत और चीन में भूकंप से कांपी धरती, 45 मिनट में तीन शक्तिशाली झटके

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लगभग 45 मिनट के भीतर आए इन तीन झटकों के कारण लोगों में चिंता बढ़ गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, पहला भूकंप रात करीब 8 बजकर 3 मिनट पर दर्ज हुआ और इसका केंद्र जमीन के नीचे लगभग 173 किलोमीटर की गहराई में था। इसके बाद चीन में 5.2 तीव्रता तथा तिब्बत में 5.0 तीव्रता के झटके दर्ज किए गए। शुरुआती रिपोर्टों में जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई थी। हालांकि, प्रभावित इलाकों की विस्तृत स्थिति और संभावित नुकसान का आकलन किए जाने की जरूरत बनी हुई है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, रात लगभग 8 बजकर 3 मिनट पर पहला झटका आया। इसकी तीव्रता 7.0 बताई गई। इसके करीब 27 मिनट बाद, रात 8 बजकर 30 मिनट के आसपास चीन में 5.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया।

फिर रात 8 बजकर 42 मिनट पर तिब्बत में 5.0 तीव्रता का एक और झटका आया। कम समय में लगातार तीन घटनाएं दर्ज होने से क्षेत्र की भूकंपीय गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित हुआ है। बड़े भूकंप के बाद आने वाले झटकों को समझने के लिए वैज्ञानिक उनकी तीव्रता, स्थान और गहराई का अध्ययन करते हैं।

हिमालयी पठार पर पर्यावरणीय बदलाव भी चिंता का विषय

तिब्बत और छिंगहाई-तिब्बत पठार भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं। विशेषज्ञों और चीनी शोधकर्ताओं ने पहले चेताया है कि वैश्विक तापमान बढ़ने से यहां के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इससे प्राकृतिक आपदाओं और जल संसाधनों से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इस क्षेत्र से ब्रह्मपुत्र सहित कई प्रमुख नदियां निकलती हैं, जिनका पानी अनेक इलाकों और देशों के लोगों के लिए अहम है। इसलिए यहां होने वाले पर्यावरणीय बदलावों का असर केवल पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि नीचे के क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

सितंबर में भी दर्ज हुआ था भूकंप

इससे पहले 3 सितंबर को तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। उस घटना का समय दोपहर लगभग 1 बजकर 46 मिनट बताया गया था। उसका केंद्र 31.479 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 80.370 डिग्री पूर्वी देशांतर के पास जमीन से करीब 14 किलोमीटर नीचे स्थित था। सितंबर में नेपाल में भी भूकंप आने की खबर सामने आई थी। उस समय नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास हिमस्खलन और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं के बाद राहत कार्यों की चुनौती भी बनी हुई थी। हालांकि, अलग-अलग घटनाओं के बीच सीधा संबंध मानने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी होते हैं।

भूकंप आने की वजह क्या होती है?

पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है। ये प्लेटें लगातार धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जहां प्लेटें आपस में टकराती हैं, अलग होती हैं या एक-दूसरे के पास से गुजरती हैं, वहां चट्टानों में तनाव जमा हो सकता है। जब यह तनाव अचानक मुक्त होता है, तो ऊर्जा तरंगों के रूप में फैलती है और धरती में कंपन पैदा होता है। भूकंप का असर उसके केंद्र, गहराई, तीव्रता और स्थानीय जमीन की बनावट पर निर्भर करता है। शक्तिशाली भूकंप के झटके केंद्र से काफी दूर तक महसूस किए जा सकते हैं।

भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है?

भूकंप का आकलन करने के लिए वैज्ञानिक भूकंपीय उपकरणों से जमीन में पैदा हुई तरंगों को रिकॉर्ड करते हैं। रिक्टर पैमाना ऐतिहासिक रूप से भूकंप की तीव्रता बताने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है, जबकि आधुनिक रिपोर्टों में अक्सर मोमेंट मैग्नीट्यूड स्केल का भी उपयोग होता है। किसी भूकंप की तीव्रता का आंकड़ा और लोगों द्वारा महसूस किए गए कंपन का असर एक ही बात नहीं हैं। वास्तविक नुकसान जानने के लिए इमारतों की स्थिति, आबादी, भूकंप की गहराई और स्थानीय प्रशासन की रिपोर्टों का आकलन करना जरूरी होता है।

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