नई दिल्ली: ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा की जीत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि चुनाव में धांधली हुई हो सकती है, लेकिन अपने आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया। दूसरी ओर, उन्होंने अमेरिका में चुनावी धोखाधड़ी की जानकारी देने वालों को 10 लाख डॉलर का इनाम देने की घोषणा भी की है। इस बीच, ब्राजील में लूला की जीत के बाद राजनीतिक विवाद के साथ बाजार में भी हलचल देखने को मिली है।
पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने ब्राजील के चुनाव को संदिग्ध बताया। उन्होंने मतदान का समय दो घंटे बढ़ाए जाने और वोटों की गिनती पर भी सवाल उठाए। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कथित गड़बड़ी किस तरह हुई। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अलग पोस्ट में कहा कि अमेरिका में पिछले चुनावों या 2026 के मध्यावधि चुनाव में मतदाता धोखाधड़ी की जानकारी देने वाले व्यक्ति को दोषियों की गिरफ्तारी और सजा के बाद 10 लाख डॉलर दिए जाएंगे।
फ्लावियो ने हार मानने से किया इनकार
ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जैर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो ने लूला की जीत स्वीकार करने से इनकार किया है। उन्होंने मतदान का समय बढ़ाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए नतीजा रद्द कराने की मांग करने की बात कही। हालांकि, इंस्पर के प्रोफेसर पेड्रो बुर्गोस के विश्लेषण के मुताबिक, अतिरिक्त दो घंटों में 35 हजार से कम वोट पड़े थे, जो कुल मतदान का लगभग 0.03 प्रतिशत था। लूला ने फ्लावियो को 40 लाख से अधिक वोटों के अंतर से हराया। ब्राजील के उपराष्ट्रपति गेराल्डो अल्कमिन ने भी ट्रंप के आरोपों को गलत और निराधार बताया।
लूला की जीत के बाद बाजार में गिरावट
लूला की जीत से उन निवेशकों को झटका लगा, जिन्हें फ्लावियो बोल्सोनारो की जीत की उम्मीद थी। सोमवार को ब्राजील की मुद्रा रियल डॉलर के मुकाबले 8.1 प्रतिशत गिर गई। यह 2002 के बाद एक दिन में आई सबसे बड़ी गिरावट बताई गई। शेयर बाजार में भी 2020 के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट दर्ज हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक अब नई सरकार की आर्थिक नीतियों और वित्तीय अनुशासन को लेकर स्पष्टता चाहते हैं। लूला ने अपने प्रचार में गरीबी कम करने, रोजगार बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर जोर दिया था।
चौथे कार्यकाल में लूला के सामने चुनौतियां
चुनावी सर्वेक्षणों में पहले दौर के दौरान लूला अपने प्रतिद्वंद्वी से पीछे थे, लेकिन दूसरे दौर में उन्होंने जीत हासिल कर अनुमानों को गलत साबित कर दिया। उनकी सफलता को लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी दलों के बढ़ते प्रभाव के बीच अहम माना जा रहा है। हालांकि, राष्ट्रपति बनने के बाद भी लूला के लिए राह आसान नहीं होगी। संसद में दक्षिणपंथी दलों की मजबूत मौजूदगी के कारण उन्हें अपनी योजनाएं लागू करने के लिए समर्थन जुटाना पड़ सकता है। ऐसे में उनकी सरकार की आर्थिक नीतियों और राजनीतिक रणनीति पर दुनिया की नजर रहेगी।












