नई दिल्ली: सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ता तनाव अब देश के अहम ऊर्जा ठिकानों तक पहुंच गया है। मंगलवार देर रात सऊदी अरब के पूर्वी शहर धहरान में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल सऊदी अरामको के प्रशासनिक परिसर पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया गया। हमले के बाद इमारत में आग लग गई और परिसर को नुकसान पहुंचा। हालांकि, शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
अरामको की इमारत की ऊपरी मंजिलों को नुकसान
सऊदी सरकारी समाचार एजेंसी एसपीए ने बुधवार को ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से हमले की जानकारी दी। वहीं, रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि मिसाइल हमले में ऑफिस की ऊपरी तीन मंजिलें क्षतिग्रस्त हो गईं। इमारत में आग लगने की भी सूचना मिली।
अरामको का यह परिसर कंपनी के प्रमुख संचालन केंद्रों में शामिल है। सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में इस तेल कंपनी की अहम भूमिका है। इसके नेटवर्क में तेल उत्पादन केंद्रों से लेकर पाइपलाइन, रिफाइनरी और निर्यात टर्मिनल तक शामिल हैं। ऐसे में इस परिसर पर हमला ऊर्जा क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाता है।
रियाद समेत कई इलाकों में मिसाइल और ड्रोन रोकने का दावा
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि धहरान के ऊपर एक मिसाइल को रोक दिया गया। इसके टुकड़े एक रिहायशी इलाके में गिरे। अधिकारियों ने रियाद और देश के दक्षिणी हिस्सों में भी मिसाइलों तथा ड्रोन को नष्ट करने का दावा किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह से सऊदी अरब के अहम ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिशें हो रही हैं। इनमें रियाद का हवाई अड्डा भी शामिल है। लगातार हमलों के कारण उड़ान सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
हूतियों ने पहले ही दी थी हमले की चेतावनी
धहरान में हमले से पहले हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने सना पर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की कार्रवाई के जवाब में कड़ी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी दी थी। संभावित निशानों में अरामको का परिसर और रियाद की एक तेल रिफाइनरी शामिल बताई गई थी। उधर, यमन की राजधानी सना के बाहरी इलाके में स्थित एक तेल डिपो पर भी गठबंधन ने कार्रवाई की। हूतियों ने इसे अपने ठिकानों पर हमला बताया, जबकि गठबंधन ने कहा कि उसका उद्देश्य विद्रोहियों की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है। इस बीच, ईरान ने सऊदी अरब और हूतियों के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है। बढ़ते हमलों के बीच यह पहल क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।












