महिला को एसजीपीसी की सराय में इतने समय तक क्यों रखा गया, और उसे वहां कौन लेकर आया? बलतेज पन्नू

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चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल (बादल) और एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी पर श्री आनंदपुर साहिब में एसजीपीसी की सराय से जुड़े विवाद और अमरजीत सिंह चावला तथा मलकीत सिंह के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर को लेकर तीखा हमला बोला। बलतेज पन्नू ने कहा कि अमरजीत सिंह चावला और मलकीत सिंह को पंथ से बाहर किए जाने के बाद भी, एसजीपीसी ने अपनी संस्थाओं और गुरुद्वारों के बाहर एक भी बोर्ड नहीं लगाया, जिसमें सिख संगत को यह जानकारी दी गई हो कि उनके साथ कोई संबंध न रखा जाए।

 धामी प्रेस कॉन्फ्रेंस से बच रहे, 15 दिन का समय देने पर सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आप पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने कहा कि हरजिंदर सिंह धामी प्रेस कॉन्फ्रेंस से बच रहे हैं और इसकी बजाय चार सदस्यीय समिति की घोषणा करने के लिए वीडियो के माध्यम से सामने आए हैं। उन्होंने समिति को जवाब देने के लिए 15 दिनों का समय दिया है। 15 दिन देने का क्या मकसद है? क्या हरजिंदर सिंह धामी को उम्मीद है कि 15 दिनों बाद लोग इस मामले को भूल जाएंगे? सिख बुद्धिजीवी और विभिन्न सिख संगठन अब सवाल पूछ रहे हैं, और एसजीपीसी को उनके जवाब देने होंगे।

जूनियर सदस्यों की समिति पर सवाल, कानूनी विशेषज्ञता की कमी

समिति के गठन पर सवाल उठाते हुए बलतेज पन्नू ने पूछा कि जूनियर सदस्य उन सीनियर नेताओं से पूछताछ कैसे कर सकते हैं, जिनके नाम इस विवाद में सामने आए हैं। महिला ने खुद अपने वीडियो में कहा है कि वह अपनी शिकायत लेकर लोगों के पास गई थी। इस मामले में सुखबीर सिंह बादल और हरजिंदर सिंह धामी के नाम लिए गए हैं। उन्होंने पूछा क्या ये जूनियर सदस्य उनसे पूछताछ करेंगे? इन चार सदस्यों में से किसी के पास ऐसे गंभीर मामले की जांच करने के लिए आवश्यक कानूनी विशेषज्ञता है?

 निष्पक्ष जांच के लिए सेवानिवृत्त जज या पुलिस अधिकारी क्यों नहीं शामिल

आप पंजाब के मीडिया प्रभारी ने कहा कि यदि एसजीपीसी सच में निष्पक्ष जांच चाहती होती, तो वह किसी सेवानिवृत्त सिख जज या किसी सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी को शामिल कर सकती थी जो अमृतधारी गुरसिख हो और जांच तथा कानून का अनुभव रखता हो। बलतेज पन्नू ने पूछा “ऐसे किसी व्यक्ति को शामिल क्यों नहीं किया गया? क्या इस बात का डर था कि एक ईमानदार और स्वतंत्र जांच से सच सामने आ सकता है?

सराय में महिला को रखने और झिंझर-वलटोहा की भूमिका पर सवाल

बलतेज पन्नू ने सवाल किया कि महिला को इतने लंबे समय के लिए एसजीपीसी की सराय में रहने की इजाजत क्यों दी गई और मांग की कि वहां वास्तव में क्या हुआ था, इसका जवाब दिया जाए। उन्होंने यह भी पूछा कि सरबजीत सिंह झिंझर और विरसा सिंह वलटोहा की महिला को वहां लाने में क्या भूमिका थी और क्या समिति उनसे उन परिस्थितियों के बारे में पूछताछ करेगी जिनमें उसे सराय में लाया गया था।

मामले को लटकाने और ठंडा करने की कोशिश का आरोप

बलतेज पन्नू ने कहा कि यह सारी कारवाई मामले को लटकाने और ठंडा करने के मकसद से की गई लगती है। उन्होंने कहा उन्होंने जूनियर सदस्यों की एक समिति बनाई है और इसे 15 दिनों का समय दिया है ताकि मुद्दे को आगे टाला जा सके। लेकिन लोग अब सवाल पूछ रहे हैं, और एसजीपीसी सिर्फ एक समिति की घोषणा करके उन सवालों से भाग नहीं सकती। आप पंजाब के मीडिया प्रभारी ने महिला के चरित्र की ओर ध्यान भटकाने की कोशिशों पर भी सख्त आपत्ति जताई। बलतेज पन्नू ने कहा कि एसजीपीसी की सराय और जिन हालात में उसे वहां रखा गया था, उसके बारे में सवालों के जवाब देने की बजाय, उसके खिलाफ दर्ज किए गए कथित मामलों और जेल में बिताए समय के बारे में बयानबाजी की जा रही है। उन्होंने कहा ध्यान महिला पर क्यों केंद्रित किया जा रहा है? सवाल तो इस बारे में हैं कि एसजीपीसी की सराय में क्या हुआ, उसे वहां कौन लेकर आया, उसे वहां क्यों रखा गया और एसजीपीसी की लीडरशिप इसके बारे में क्या जानती थी।

सीनियर अकाली नेताओं की चुप्पी पर निशाना

बलतेज पन्नू ने कहा, सीनियर अकाली नेताओं की चुप्पी भी बहुत कुछ बयान करती है। सुखबीर सिंह बादल और हरसिमरत कौर बादल ने सवालों के जवाब देने से इनकार क्यों किया और बिक्रम सिंह मजीठिया, जो राजनीतिक मुद्दों पर कई प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं, वह भी इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं।

हरसिमरत कौर बादल और अन्य नेताओं की चुप्पी पर सवाल

बलतेज पन्नू ने कहा हरसिमरत कौर बादल तब महिलाओं को इकट्ठा करती हैं जब यह उनके राजनीतिक प्रचार के अनुकूल होता है, लेकिन जब मामला एक ऐसी महिला से संबंधित होता है जो गंभीर आरोप लगा रही है, तो हरसिमरत कौर बादल के पास कहने के लिए कुछ नहीं होता। सुखबीर सिंह बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया भी सवालों से भाग रहे हैं। वे मीडिया का सामना करने की बजाय वीडियो जारी कर रहे हैं। बलतेज पन्नू ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा भी पूरी तरह से चुप बैठे हुए हैं। उन्होंने कहा “मैं इस मुद्दे पर बहसें देखता हूं। भाजपा के प्रवक्ता इस पर बोलने के लिए सामने भी नहीं आ रहे। कांग्रेसी नेता प्रताप सिंह बाजवा और राजा वड़िंग भी चुप हैं। जो नेता हर राजनीतिक मुद्दे पर बहुत कुछ बोलते हैं, जब इस मामले पर सवाल पूछे जा रहे हैं तो वे अचानक गायब हो गए हैं।

बादल परिवार के एसजीपीसी पर नियंत्रण पर निशाना

सिख संस्थाओं पर बादल परिवार के नियंत्रण पर निशाना साधते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल की अगुवाई में एसजीपीसी की हालत सबके सामने है। बलतेज पन्नू ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल अकाली दल के “मुख्य संरक्षक” हैं जबकि हरजिंदर सिंह धामी एसजीपीसी के लिए जिम्मेदार हैं, और सवाल किया कि न तो सुखबीर सिंह बादल और न ही हरजिंदर सिंह धामी सिख संगत को संतोषजनक जवाब क्यों दे रहे हैं।

एसजीपीसी चुनाव और राजनीतिक हितों पर सवाल

बलतेज पन्नू ने एसजीपीसी चुनावों से जुड़े हालात और इस मामले में राजनीतिक हितों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। चार सदस्यीय समिति के एक सदस्य का जिक्र करते हुए उन्होंने पूछा कि क्या यह वही व्यक्ति है जो एसजीपीसी चुनावों के संबंध में हाईकोर्ट गया था और जिसकी याचिका ने चुनाव रोक दिए थे।

समिति सदस्य की पृष्ठभूमि और हरियाणा सिख गुरुद्वारा समिति पर सवाल

बलतेज पन्नू ने कहा कि यह व्यक्ति हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के लिए चुना गया सदस्य भी है और सवाल किया कि क्या मौजूदा विवाद की जांच के लिए समिति का गठन करते समय ऐसे मुद्दों को नजरअंदाज किया जाना चाहिए। बलतेज पन्नू ने कहा कि बादल लीडरशिप एसजीपीसी चुनावों को रोकना चाहती है और इस संदर्भ में भाजपा की चुप्पी पर सवाल उठाए। बलतेज पन्नू ने कहा कि बादलों और भाजपा के बीच कथित राजनीतिक समझौते को सिख संस्थाओं पर नियंत्रण के बड़े सवाल से अलग नहीं किया जा सकता।

 सिख संस्थाओं की छवि को नुकसान, संगत को स्पष्ट जवाब की मांग

बलतेज पन्नू ने कहा कि एसजीपीसी सदस्यों की जिम्मेदारी बनती है कि वे चुप रहने की बजाय बोलें। बलतेज पन्नू ने कहा कि सिख बुद्धिजीवियों और विभिन्न सिख संगठनों को सवाल पूछना जारी रखना चाहिए क्योंकि, बलतेज पन्नू के अनुसार, इस विवाद ने सिख संस्थाओं की छवि और साख को भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा “ये हमारी महान और सम्मानीय संस्थाएं हैं। जो भी हुआ है, उससे उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है। सवाल यह है कि सिख संगत को स्पष्ट जवाब देने की बजाय अब मामले को दबाने की कोशिश क्यों की जा रही है।

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