नई दिल्ली: राहुल गांधी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। वीडियो में राहुल गांधी दिल्ली में विपक्षी मार्च के दौरान कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार का कॉलर खींचते हुए नजर आ रहे हैं। इस घटना को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है।
“यह कर्नाटक का अपमान”: हिमंत बिस्वा
हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए इसे सार्वजनिक अपमान करार दिया। उन्होंने लिखा, “2015 में एक गर्वित असमिया के तौर पर मैंने अपमान सहने से इनकार कर दिया था। भगवान मेरे साथ थे।” सरमा ने सवाल उठाया कि डीके शिवकुमार सिर्फ एक व्यक्ति नहीं हैं, वे एक संवैधानिक पद पर हैं और एक गौरवशाली इतिहास वाले राज्य का चेहरा हैं।
In 2015, I refused to swallow humiliation, as a proud Assamese. God was kind to me. The Chief Minister of Karnataka is not just an individual. He is a constitutional office, and the face of a State with a glorious history, a rich culture and deep pride. Will he bow to this public humiliation? “Reinvention” can’t hide arrogance. Change the mask all you like; the face beneath stays the same.
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) October 13, 2026
क्या वे इस सार्वजनिक बेइज्जती के सामने झुकेंगे? उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि ‘रीइन्वेंशन’ से घमंड नहीं छिपता, आप जितना मुखौटा बदल लें, असली चेहरा वही रहता है। उन्होंने 2015 की घटना का जिक्र भी किया जब वे कांग्रेस में थे और राहुल गांधी से नाराज होकर पार्टी छोड़ दी थी।
वीडियो में क्या दिखा?
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ के बीच डीके शिवकुमार आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी प्रियंका गांधी और नेहा बोरा के साथ मार्च कर रहे थे, जैसे ही शिवकुमार दाईं ओर से आगे आए, राहुल ने उनके कुर्ते का कॉलर पकड़कर पीछे खींच दिया, जिससे उनका संतुलन बिगड़ गया। इसके साथ ही सुरक्षाकर्मी भी उन्हें पीछे धकेलते दिखे।
इस वीडियो पर भाजपा नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। बेंगलुरु साउथ से सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि राजनीति से हटकर देखें तो डीके शिवकुमार कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी ऐसी सार्वजनिक बेइज्जती 7 करोड़ कन्नड़ लोगों का अपमान है। उन्होंने इसकी तुलना पूर्व पीएम राजीव गांधी द्वारा वीरेंद्र पाटिल को हटाने की घटना से की। वहीं भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने कहा कि राजनीतिक विशेषाधिकार किसी को दूसरों की बेइज्जती का हक नहीं देता।
क्यों निकाला गया था मार्च?
यह घटना सोमवार को दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए इंडिया गठबंधन के मार्च के दौरान हुई। विपक्षी नेता वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ज्ञापन देना चाहते थे। वहीं बाद नें नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट पहुंच कर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मिलने की कोशिश की, हालांकि उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। बता दें, इस मार्च में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और युवा कांग्रेस व एनएसयूआई के कार्यकर्ता भी शामिल थे।












