चालान का प्रहार, जागरूकता की हुंकार! प्रदूषण और जाम के खिलाफ पूर्वी दिल्ली यातायात पुलिस का महाअभियान

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नई दिल्ली: सड़क पर नियम तोड़ने वालों की अब खैर नहीं! कहीं गलत दिशा में वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई, कहीं लालबत्ती पार करने वालों पर शिकंजा, तो कहीं बिना हेलमेट दौड़ते वाहन चालकों को यातायात अनुशासन का पाठ। पूर्वी दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने सड़कों को सुरक्षित बनाने और यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पूर्वी रेंज की यातायात पुलिस ने सख्ती और जागरूकता का दोहरा मोर्चा खोल दिया है। इस अभियान का संदेश साफ है—“नियम तोड़ोगे तो चालान होगा, नियम मानोगे तो सफर आसान होगा।

पूर्वी रेंज की यातायात पुलिस ने सात जुलाई से 25 अक्टूबर 2026 के बीच 42 चौराहों और प्रमुख स्थानों पर चलाए गए यातायात पाठशाला अभियान के दौरान कुल 8982 यातायात उल्लंघन दर्ज किए। इनमें बिना हेलमेट वाहन चलाने के 4231 गलत दिशा में वाहन चलाने के 2010 तीन सवारी बैठाकर वाहन चलाने के 872 लालबत्ती का उल्लंघन करने के 343 और अन्य श्रेणियों के 1526 मामले शामिल हैं। आंकड़े बताते हैं कि यातायात अनुशासन की लड़ाई में सबसे बड़ी चुनौती दोपहिया वाहन चालकों का हेलमेट के प्रति लापरवाह रवैया बना हुआ है। लेकिन पुलिस का लक्ष्य केवल चालान काटना नहीं, बल्कि लोगों की आदत बदलना भी है। इसी उद्देश्य से 614 जागरूकता सत्र आयोजित कर 7780 लोगों को यातायात नियमों की जानकारी दी गई जबकि नियमों का पालन करने वाले 616 लोगों को पुरस्कृत कर दूसरों के सामने सकारात्मक उदाहरण पेश किया गया।

गलत दिशा में वाहन चलाया तो कार्रवाई, नियम तोड़े तो जवाबदेही!

यातायात पुलिस की व्यापक प्रवर्तन कार्रवाई के संकलित आंकड़े भी सख्ती की तस्वीर सामने रखते हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार गलत दिशा में वाहन चलाने के मामलों में 833 प्राथमिकी दर्ज की गईं और 61,932 ई-चालान किए गए। बिना हेलमेट वाहन चलाने के 63,941, गलत पार्किंग के 1,95,226, नशे में वाहन चलाने के 3754, शीशों पर प्रतिबंधित काली फिल्म के 3231, लालबत्ती उल्लंघन के 5800 और तीन सवारी बैठाने के 8077 मामले दर्ज किए गए। ये आंकड़े अलग अवधि के व्यापक प्रवर्तन विवरण से संबंधित हैं। इनका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि यातायात नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध कार्रवाई केवल कुछ चौराहों तक सीमित नहीं है। गलत पार्किंग और गलत दिशा में वाहन चलाने जैसी आदतें सड़क की क्षमता घटाती हैं, जाम बढ़ाती हैं और वाहनों के लंबे समय तक खड़े रहने या धीमी गति से चलने के कारण प्रदूषण की समस्या को भी गंभीर बना सकती हैं।

स्कूलों से चौराहों तक जागरूकता की दस्तक

पूर्वी रेंज की यातायात पुलिस ने यह समझ लिया है कि सड़क सुरक्षा की असली शुरुआत चालान से नहीं संस्कार से होती है। इसी सोच के साथ एक जनवरी से 25 अक्टूबर 2026 तक स्कूलों, प्रमुख चौराहों, नुक्कड़ नाटकों और यातायात वैन के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अवधि में स्कूलों में 102 कार्यक्रम आयोजित कर 12,608 विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। छह नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से 1893 यात्रियों पैदल यात्रियों और सार्वजनिक परिवहन चालकों तक संदेश पहुंचाया गया। इसके अतिरिक्त चौराहों पर आयोजित 222 कार्यक्रमों में 29,910 लोगों को जागरूक किया गया, जबकि यातायात वैन के 14 कार्यक्रमों के माध्यम से 3732 लोगों तक यातायात सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया। इन कार्यक्रमों में हेलमेट पहनने, निर्धारित दिशा में वाहन चलाने, लालबत्ती का सम्मान करने, पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सड़क पर अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया गया। पुलिस की कोशिश है कि नियमों का पालन केवल जुर्माने के डर से नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी समझकर किया जाए।

जनता की भागीदारी से सड़क सुधार की मुहिम

सड़क पर जाम और अव्यवस्था का समाधान केवल पुलिस के बूते संभव नहीं। इसके लिए स्थानीय नागरिकों, बाजार संगठनों और संबंधित सरकारी विभागों की भागीदारी भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से पांच अप्रैल से 25 अक्टूबर 2026 के बीच पूर्वी रेंज की यातायात पुलिस ने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ बैठकें कीं। इस दौरान रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के साथ 58, मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन के साथ 31 और नगर निगम, लोक निर्माण विभाग तथा दिल्ली मेट्रो रेल निगम सहित अन्य एजेंसियों के साथ 38 बैठकें की गईं। इस प्रकार कुल 127 बैठकें आयोजित हुईं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 160 सुझाव प्राप्त हुए, जिनमें 143 पर कार्रवाई की गई और 16 सुझाव संबंधित एजेंसियों को भेजे गए। हालांकि, इन दोनों श्रेणियों का योग 159 है, इसलिए एक सुझाव की स्थिति की पुष्टि अपेक्षित है।इन बैठकों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर जाम, गलत पार्किंग, सड़क की खराब स्थिति, संकेतक बोर्ड और यातायात संचालन से जुड़ी समस्याओं को सामने लाकर समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए गए।

सिग्नल-फ्री सड़कों से रफ्तार, जाम और प्रदूषण पर वार

पूर्वी दिल्ली में यातायात प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए कुछ मार्गों पर सिग्नल-फ्री व्यवस्था विकसित करने का काम पूरा होने की जानकारी दी गई है। इनमें बिहारी कॉलोनी से कड़कड़ी मोड़ तक सड़क संख्या 57 कड़कड़ी मोड़ से लक्ष्मी नगर और शास्त्री पार्क से खजूरी चौक से पहले तक का मार्ग शामिल है। इसके अतिरिक्त अप्सरा बॉर्डर से शाहदरा फ्लाईओवर और कश्मीरी लालबत्ती से कड़कड़डूमा ब्लिंकर तक की परियोजनाएं लागू किए जाने की प्रक्रिया में हैं। इन पहलों का उद्देश्य अनावश्यक रूप से रुकने वाले वाहनों की संख्या घटाना, यातायात का प्रवाह बेहतर करना और जाम के कारण होने वाली ईंधन की खपत तथा प्रदूषण को कम करने में मदद करना है। हालांकि सिग्नल-फ्री व्यवस्था के साथ सुरक्षित पैदल पारपथ, उचित संकेतक और गति नियंत्रण सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक होगा।

आनंद विहार बस अड्डे पर सुधार का खाका तैयार

पूर्वी दिल्ली के सबसे व्यस्त यातायात क्षेत्रों में शामिल अंतरराज्यीय बस अड्डा, आनंद विहार, भी यातायात पुलिस की प्राथमिकताओं में है। यहां बसों की आवाजाही, ऑटो-टैक्सी की कतारें, गलत पार्किंग और पैदल यात्रियों की सुरक्षा जैसी चुनौतियों को देखते हुए कई सुधारात्मक सुझाव दिए गए हैं। प्रस्तावों में पैदल यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए तीन नए पैदल ऊपरी पुलों का निर्माण, बस अड्डे के स्थान और बस खड़े करने की निर्धारित जगहों के बेहतर उपयोग के लिए तकनीकी अध्ययन तथा उत्तर प्रदेश के कौशांबी क्षेत्र में बसों के ठहराव के लिए उपयुक्त स्थान की पहचान शामिल है। चौधरी चरण सिंह मार्ग से कौशांबी बस टर्मिनल को स्थानांतरित करने के लिए भी जगह तलाशने का सुझाव दिया गया है ताकि मुख्य मार्ग पर बसों के कारण लगने वाले जाम को कम किया जा सके।

सड़क संख्या 56 पर क्षतिग्रस्त केंद्रीय विभाजक की रेलिंग की मरम्मत, प्रवेश द्वार पर दिशा-सूचक और निषेध पार्किंग संकेतक लगाने, ऑटो-टैक्सी के लिए अलग लेन विकसित करने तथा बस अड्डे के क्षेत्र में दोनों ओर गति नियंत्रित करने वाली पट्टियां लगाने जैसे उपाय भी प्रस्तावित हैं।

इसके साथ ही जरूरत वाले स्थानों पर अवरोधक लगाने, गड्ढों की मरम्मत सड़क पर बनी सफेद पट्टियों और पैदल पारपथ को दोबारा स्पष्ट करने तथा परावर्तक संकेतक लगाने की सिफारिश की गई है।

चौधरी चरण सिंह मार्ग पर यात्रियों को अनधिकृत रूप से उतारने और बैठाने पर रोक, अग्रिम भुगतान वाले वाहन बूथों की आवाजाही का नियमन, निर्धारित स्थानों के बाहर बस पार्किंग पर नियंत्रण और खाली बस खड़े करने की जगहों का बेहतर उपयोग भी सुधार योजना का हिस्सा है।

अतिक्रमण और गलत पार्किंग हटाने के लिए नगर निगम तथा स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त अभियान चलाने का प्रस्ताव है। बाधित यातायात, खराब वाहनों और गलत पार्किंग से निपटने के लिए तीन मोटरसाइकिल गश्ती दल और एक यातायात क्रेन की व्यवस्था का सुझाव दिया गया है। व्यस्त समय में बसों के प्रवेश और निकास को व्यवस्थित करने के लिए दिल्ली परिवहन निगम के यातायात मार्शल तैनात करने तथा मेट्रो और बस अड्डे के प्रवेश द्वारों के आसपास ऑटो, ई-रिक्शा और टैक्सी की आवाजाही नियंत्रित करने पर भी जोर दिया गया है। ये सभी प्रस्ताव यातायात पुलिस और संबंधित एजेंसियों के समन्वय से लागू किए जाने वाले सुधारात्मक कदम हैं। इनका वास्तविक लाभ इनके प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी पर निर्भर करेगा।

डीसीपी श्वेता सिंह चौहान की अगुवाई में सड़क सुरक्षा पर जोर

पूर्वी रेंज की यातायात पुलिस उपायुक्त श्वेता सिंह चौहान के नेतृत्व में चल रही इस मुहिम में कार्रवाई जनजागरूकता और यातायात प्रबंधन को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना, यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाना और नागरिकों को नियमों के प्रति जिम्मेदार बनाना है। श्वेता सिंह चौहान ने नागरिकों से अपील की गई है कि वे हेलमेट पहनें, गलत दिशा में वाहन न चलाएं, लालबत्ती का पालन करें, नशे में वाहन चलाने से बचें और सड़क पर अनावश्यक पार्किंग न करें। साथ ही स्थानीय यातायात समस्याओं के समाधान के लिए अपने सुझाव भी दें, ताकि पुलिस और संबंधित विभाग मिलकर व्यावहारिक सुधार कर सकें। पूर्वी दिल्ली की सड़कों पर बदलाव की असली जीत तब होगी, जब हर वाहन चालक नियमों को बोझ नहीं, सुरक्षा का कवच समझेगा। क्योंकि मंजिल पर देर से पहुंचना मंजूर हो सकता है, लेकिन लापरवाही के कारण किसी की जिंदगी दांव पर लगना नहीं।

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