DTU में ‘संवाद’ का मंच युवाओं को नशे और साइबर अपराध से बचने का मंत्र, 600 छात्र-छात्राओं के बीच दिल्ली पुलिस की पाठशाला

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नई दिल्ली: फिल्मों में अक्सर एक संवाद पूरी कहानी बदल देता है लेकिन दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘संवाद’ कार्यक्रम में दिए गए संदेश युवाओं की जिंदगी की दिशा बदलने का संकल्प लेकर सामने आए। दिल्ली पुलिस ने युवाओं को नशे के जाल और तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों से बचाने के लिए डीटीयू में जागरूकता का ऐसा मंच सजाया, जहां पुलिस अधिकारी शिक्षाविद और विशेषज्ञ सीधे विद्यार्थियों से रूबरू हुए। कार्यक्रम में दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी सहित एनआईटी अदिति महाविद्यालय सिरी फोर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और दिल्ली कॉलेज फॉर एडवांस्ड स्टडीज के करीब 600 छात्र-छात्राओं एवं फैकल्टी सदस्यों ने हिस्सा लिया।

Delhi Police Drug Awareness
Delhi Police Drug Awareness JBT/ Pankaj Rai

संयुक्त पुलिस आयुक्त विजय सिंह ने युवाओं से किया सीधा संवाद

कार्यक्रम में विजय सिंह संयुक्त पुलिस आयुक्त नॉर्दर्न रेंज ने छात्रों को संबोधित करते हुए नशे से दूर रहने और जीवन में जागरूक एवं जिम्मेदार निर्णय लेने का संदेश दिया। उन्होंने युवाओं से न केवल स्वयं नशे से दूर रहने, बल्कि नशे और साइबर अपराधों की रोकथाम में भी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को समझाया कि आज के दौर में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। गलत संगत नशे की शुरुआत या डिजिटल दुनिया में छोटी सी लापरवाही आगे चलकर गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है।

डीटीयू कुलपति ने की दिल्ली पुलिस की पहल की सराहना

इस अवसर पर डीटीयू के कुलपति प्रतीक शर्मा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं के साथ सीधे संवाद स्थापित कर सामाजिक और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए दिल्ली पुलिस की पहल की सराहना की। कुलपति ने कहा कि शिक्षण संस्थानों और पुलिस के बीच संवाद बढ़ने से विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की चुनौतियों को समझने और उनसे निपटने की बेहतर तैयारी मिलती है।

नशे की गिरफ्त से निकलकर उद्यमी बने नील डी’सिल्वा ने सुनाई अपनी कहानी

कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक और प्रेरणादायक पड़ाव उस समय आया जब नील डी’सिल्वा ने विद्यार्थियों के सामने अपनी जिंदगी का अनुभव साझा किया। नशे की लत से उबर चुके नील डी’सिल्वा अब एक सफल उद्यमी हैं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभवों के जरिए विद्यार्थियों को बताया कि नशा किस तरह व्यक्ति के साथ-साथ उसके परिवार और पूरे सामाजिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। उनका सत्र किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था जहां गलत रास्ते से वापसी कर इंसान अपनी जिंदगी को फिर से नई दिशा दे सकता है। उन्होंने छात्रों को स्वस्थ जिम्मेदार और नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।

साइबर विशेषज्ञ ने खोली ऑनलाइन ठगी की ‘डिजिटल पटकथा’

नशे के खिलाफ जागरूकता के बाद कार्यक्रम का रुख डिजिटल दुनिया की ओर हुआ। साइबर विशेषज्ञ गोविंद राय ने छात्रों को साइबर अपराधों के बदलते तौर-तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने ऑनलाइन धोखाधड़ी निजी जानकारी की सुरक्षा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार और साइबर दुनिया में सतर्क रहने के उपायों के बारे में विस्तार से बताया। विद्यार्थियों को समझाया गया कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं इसलिए किसी भी अनजान लिंक, संदेश, फोन कॉल या डिजिटल प्रस्ताव पर आंख बंद करके भरोसा करना भारी पड़ सकता है।

‘1930’ हेल्पलाइन का संदेश, ठगी होते ही तुरंत एक्शन

बाहरी उत्तरी जिले के डीसीपी शोभित डी. सक्सेना के नेतृत्व में कार्यक्रम में दिल्ली पुलिस की नागरिक-केंद्रित पहलों पर विशेष जागरूकता प्रस्तुति  फिरोज आलम, एसीपी बादली द्वारा दी गई। छात्रों को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने की स्थिति में तत्काल 1930 साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के महत्व के बारे में बताया गया। साथ ही उन्हें दिल्ली पुलिस की एमआरएम (मोबाइल रिकवरी मैकेनिज्म) और जीआरएम (शिकायत निवारण तंत्र) जैसी पहलों की जानकारी भी दी गई।पुलिस ने छात्रों को संदेश दिया कि साइबर ठगी का शिकार होने के बाद चुप बैठने के बजाय जितनी जल्दी संभव हो, उतनी जल्दी शिकायत करना जरूरी है।

सिर्फ भाषण नहीं, सवाल-जवाब भी युवाओं ने खुलकर रखी बात

संवाद कार्यक्रम को महज भाषणों तक सीमित नहीं रखा गया। विभिन्न सत्रों को संवादात्मक और छात्र-केंद्रित बनाया गया ताकि विद्यार्थी पुलिस अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ सीधे बातचीत कर सकें। छात्रों ने अपने सवाल रखे और विशेषज्ञों से साइबर सुरक्षा नशे से बचाव तथा समय पर सहायता हासिल करने से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर जानकारी ली। चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि वास्तविक जिंदगी हो या डिजिटल दुनिया, जिम्मेदार व्यवहार और समय पर सही कदम उठाना बेहद जरूरी है।

पुलिस, शिक्षण संस्थान और युवा एक मंच पर तीन ताकतें

कार्यक्रम के आयोजन में डीटीयू के कुलपति, प्रशासन, फैकल्टी सदस्यों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहयोग किया। अलग-अलग शिक्षण संस्थानों से बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी ने ‘संवाद’ को पुलिस, शिक्षण संस्थानों और युवा पीढ़ी के बीच सार्थक बातचीत का प्रभावी मंच बना दिया। दिल्ली पुलिस का उद्देश्य ऐसे कार्यक्रमों के जरिए युवाओं के साथ संवाद को और मजबूत करना है ताकि जागरूकता रोकथाम जिम्मेदार नागरिकता और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा मिले।

Reported by: Pankaj Rai

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