कंपन से कांपती जिंदगी को मिला सुकून का नया रास्ता, RML में पहली बार ‘ब्रेन पेसमेकर’ सर्जरी सफल

0
12

नई दिल्ली: जब पार्किंसंस की बीमारी शरीर के हर कदम को चुनौती देने लगे हाथ-पैरों का कंपन जिंदगी की रफ्तार थामने लगे और दवाओं का असर भी बार-बार कम होने लगे तब आधुनिक चिकित्सा की नई तकनीक उम्मीद की किरण बनकर सामने आती है। कुछ ऐसा ही चिकित्सा क्षेत्र में अहम कदम डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में देखने को मिला जहां पहली बार डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) यानी ‘ब्रेन पेसमेकर’ की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की गई।काठमांडू के 55 वर्षीय पार्किंसंस मरीज पर की गई इस सर्जरी को अस्पताल में कार्यात्मक तंत्रिका शल्य चिकित्सा की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

कंपन, जकड़न और धीमी पड़ती जिंदगी के खिलाफ आधुनिक तकनीक का प्रहार

पार्किंसंस से पीड़ित मरीज लंबे समय से लगातार कंपन, मांसपेशियों में जकड़न अनियंत्रित शारीरिक गतिविधियों और चलने-फिरने में परेशानी जैसी समस्याओं से जूझ रहा था। बीमारी के साथ दवाओं के प्रभाव में होने वाले उतार-चढ़ाव ने उसकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया था। ऐसे में चिकित्सकों ने मरीज की स्थिति का आकलन करने के बाद डीप ब्रेन स्टिमुलेशन तकनीक से उपचार का निर्णय लिया। इस जटिल प्रक्रिया को प्रोफेसर डॉ. शरद पांडेय के नेतृत्व में न्यूरोसर्जरी विभाग की टीम ने अंजाम दिया। इसमें न्यूरोलॉजी रेडियोलॉजी और संज्ञाहरण विभाग के विशेषज्ञों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चार विभागों के समन्वित प्रयास ने इस सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा करने में योगदान दिया।

मस्तिष्क में लगाए जाते हैं विशेष इलेक्ट्रोड, बनता है ‘ब्रेन पेसमेकर

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन को आम भाषा में ‘ब्रेन पेसमेकर’ कहा जाता है। इस तकनीक में मस्तिष्क के उन विशेष हिस्सों में छोटे इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं जो शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं। ये इलेक्ट्रोड नियंत्रित विद्युत संकेतों के माध्यम से असामान्य तंत्रिका गतिविधियों को व्यवस्थित करने में मदद करते हैं। इस उपचार से उपयुक्त मरीजों में हाथ-पैरों के कंपन, मांसपेशियों की जकड़न गतिविधियों में धीमेपन और दवाओं के प्रभाव में होने वाले उतार-चढ़ाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, उपचार का परिणाम मरीज की स्थिति बीमारी की प्रकृति और चिकित्सकीय आकलन पर निर्भर करता है।

जब दवा का असर घटता-बढ़ता है तब बढ़ जाती है परेशानी

डॉ. शरद पांडेय के अनुसार मरीज में कंपन के साथ अनियंत्रित गतिविधियां यानी डिस्किनेशिया, जकड़न, चलने में धीमापन और दवाओं के असर में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याएं थीं। पार्किंसंस के मरीजों में दवा असर करने के दौरान वह समय आता है जब वे अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से चल-फिर पाते हैं। इसे ‘ऑन’ अवस्था कहा जाता है। वहीं दवा का असर कम होने पर कंपन, जकड़न और चलने-फिरने की परेशानी फिर बढ़ सकती है। इसे ‘ऑफ’ अवस्था कहते हैं। इन दोनों अवस्थाओं के बीच होने वाले बदलाव को ‘ऑन-ऑफ फिनॉमिना’ कहा जाता है। डीबीएस तकनीक का उद्देश्य उपयुक्त मरीजों में इस तरह के उतार-चढ़ाव और बीमारी के गंभीर लक्षणों को नियंत्रित करने में सहायता देना है।

चार विभाग, एक लक्ष्य मरीज को बेहतर जीवन की उम्मीद

इस उपलब्धि में प्रोफेसर डॉ. शरद पांडेय के नेतृत्व में न्यूरोसर्जरी टीम ने प्रमुख भूमिका निभाई। सर्जरी में न्यूरोसर्जरी विभाग से प्रोफेसर अजय चौधरी, न्यूरोलॉजी विभाग से प्रोफेसर ज्योति गर्ग, प्रोफेसर आशीष दुग्गल और डॉ. देवव्रत साहू, रेडियोलॉजी विभाग से प्रोफेसर नम्रता सचदेव तथा संज्ञाहरण विभाग से प्रोफेसर संदीप कुमार और प्रोफेसर संजीव शर्मा शामिल रहे। सर्जरी की प्रक्रिया में विशेषज्ञ मार्गदर्शन के लिए मैक्स अस्पताल गुरुग्राम के न्यूरोसर्जन डॉ. हिमांशु चंपारणी को प्रॉक्टर के रूप में आमंत्रित किया गया। विशेषज्ञों के बीच तालमेल तकनीकी दक्षता और बहु-विभागीय सहयोग इस जटिल शल्य प्रक्रिया के महत्वपूर्ण पहलू रहे।

आरएमएल के लिए नई शुरुआत, मरीजों के लिए उम्मीद का संदेश

आरएमएल अस्पताल में पहली डीबीएस सर्जरी का सफलतापूर्वक संपन्न होना कार्यात्मक न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि आधुनिक तकनीकों और विभिन्न चिकित्सा विभागों के समन्वय से पार्किंसंस जैसी तंत्रिका संबंधी बीमारियों से जूझ रहे उपयुक्त मरीजों के उपचार के नए विकल्प विकसित किए जा सकते हैं। पार्किंसंस का उपचार केवल कंपन कम करने तक सीमित नहीं है बल्कि मरीज की चलने-फिरने की क्षमता रोजमर्रा के कामकाज और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखना भी इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है। ऐसे में ‘ब्रेन पेसमेकर’ जैसी तकनीक उन मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आती है, जिनमें दवाओं के बावजूद लक्षणों पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं हो पाता।

 

Reported By: Pankaj Rai

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here